चेम्बूर में नवरात्रि पर पैंसठिया यंत्र साधना और सामूहिक मंत्र जप अनुष्ठान
साध्वी निर्वाणश्री के सान्निध्य में श्रद्धालुओं ने पैंसठिया छंद संगान और यंत्र लेखन कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की।
चेम्बूर में साध्वी निर्वाणश्री के सान्निध्य में आयोजित सामूहिक मंत्र जप अनुष्ठान में भाग लेते श्रद्धालु।
चेम्बूर में नवरात्रि अनुष्ठान के क्रम में पैंसठिया यंत्र की साधना और सामूहिक मंत्र आराधना में श्रद्धालुओं की भागीदारी देखने को मिली। अध्यात्म पुरोधा आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में पैंसठिया छंद का सामूहिक संगान किया गया। इसके साथ ही अनुष्ठानपूर्वक यंत्र लेखन की प्रक्रिया संपन्न हुई। लोगस्स एवं दसवेआलियं की गाथाओं के सुमधुर सस्वर पाठ से पूरा सभागार गूंजता रहा।
इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए विदुषी साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि पैंसठिया छंद चौबीस तीर्थंकरों के मंत्र से आवेष्टित एक महत्वपूर्ण निधि है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं ने मंत्रों के साथ आराधना कर विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त की है।
साध्वी योगक्षेमप्रभाजी ने जपानुष्ठान संपादित करवाते हुए श्रद्धालुओं को यंत्र लेखन की विधि समझाई। चौबीस तीर्थंकरों की गुण स्तवना करते हुए उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों के नाम ही अक्षय ऊर्जा के स्रोत हैं। जब श्रद्धालु पूरी भक्ति और निष्ठा के साथ उनका ध्यान करते हैं तथा मंत्र जप करते हैं, तो सुख-संपदा स्वतः अनुगामी बन जाती है।
इस सामूहिक साधना में साध्वी लावण्यप्रभा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी मुदितप्रभा एवं साध्वी मधुरप्रभा ने भी साध्वी के साथ मंत्रों और छंद का संगान किया। इससे अनुष्ठान में सामूहिक आराधना का स्वरूप देखने को मिला।
रात्रि कार्यक्रम में प्रेक्षाध्यान साधना से पूर्व 'उवसग्गहरं' के निर्धारित जप का अनुष्ठान किया जा रहा है। नवरात्रि के दौरान आयोजित इन धार्मिक गतिविधियों में पैंसठिया छंद का संगान, यंत्र लेखन और मंत्र जप साधना के प्रमुख अंग रहे।