कोटा में 15 फीट के इको फ्रेंडली रावण का वैदिक विधि से होगा दहन, 10 पुतले नि:शुल्क बांटे
पर्यावरण संरक्षण मुहिम के तहत मखमली कपड़ों से सजे रावण के पुतले का हवन सामग्री और घी से अंतिम संस्कार की तर्ज पर दहन किया जाएगा।
कोटा जंक्शन की गुरुधाम कॉलोनी में इको फ्रेंडली नवदुर्गा क्लब की ओर से आयोजित डांडिया महारास में 15 फीट ऊंचे इको फ्रेंडली रावण के पुतले के समक्ष गरबा करती महिलाएं।
कोटा में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम के तहत इस वर्ष 15 फीट ऊंचे इको फ्रेंडली रावण के पुतले का वैदिक रीति से दहन किया जाएगा। सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ की ‘पर्यावरण संरक्षण प्रहरी कोटा’ मुहिम के अंतर्गत तृतीय चरण में स्थापित ‘इको फ्रेंडली रावण दहन क्लब’ ने इसकी तैयारी की है। महासंघ के मुख्य संयोजक अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल के संयोजन में तैयार किए गए पुतले का मखमली, रेशमी वस्त्रों और जरी से भव्य श्रृंगार किया गया है।
महासंघ के संस्थापक महामंत्री एवं प्रवक्ता राजाराम जैन ‘कर्मयोगी’ (रावण सरकार) ने बताया कि रोटेदा रोड स्थित गुरुधाम कॉलोनी, कोटा जंक्शन पर इको फ्रेंडली नवदुर्गा क्लब की ओर से आयोजित डांडिया महारास कार्यक्रम के प्रांगण में पुतला स्थापित किया गया है। यहां पुतले के समक्ष गरबा करते हुए शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना की गई।
इको फ्रेंडली रावण दहन क्लब की ओर से आयोजित कार्यक्रम में प्रकांड कर्मकांडी पंडित विनीत शर्मा और उनका समूह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रावण दहन की प्रक्रिया संपन्न कराएगा। इस आयोजन में रावण दहन को अंतिम संस्कार के रूप में वैदिक विधि से संपन्न किया जाएगा।
रावण दहन की इस पर्यावरण-अनुकूल वैदिक प्रक्रिया में एक पीपा देसी घी, नारियल सहित, 11 किलोग्राम हवन सामग्री, 5 किलोग्राम चंदन की लकड़ी, 1 किलोग्राम कपूर, 2 किलो अगर-तगर और 1 किलो गूगल का उपयोग किया जाएगा।
पुतला दहन से पहले ‘राम कला संस्थान’ के निदेशक दीपक शर्मा और उनके कलाकार समूह द्वारा प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, अंगद एवं जामवंत की लीलाओं का मंचन किया जाएगा। इसके साथ ही रावण वध की लीला का भी जीवंत मंचन होगा।
इको फ्रेंडली रावण दहन क्लब के मुख्य संरक्षक अध्यक्ष डॉ. एमएल अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी में पर्यावरण-अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने के संस्कार विकसित करने के उद्देश्य से क्लब ने 7 फीट ऊंचे इको फ्रेंडली रावण के 10 पुतले नि:शुल्क वितरित किए हैं। ये पुतले उन व्यक्तियों को दिए गए हैं, जो इको फ्रेंडली तरीके से रावण दहन करना चाहते हैं। इस पहल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ पारंपरिक धार्मिक आयोजन को पर्यावरण-अनुकूल स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।