कोटा दशहरा मेला 2026: श्रीराम-सुग्रीव मैत्री और सुंदरकांड का मंचन
कोटा में आयोजित 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले में रामलीला के दौरान कलाकारों ने बाली वध और हनुमान चरित्र का सजीव मंचन किया।
कोटा दशहरा मेले में श्रीराम रंगमंच पर मानस पूजन करतीं महापौर अनुसुईया गोस्वामी।
कोटा, 18 अक्टूबर। 133वें राष्ट्रीय मेला दशहरा मेला 2026 के तहत श्रीराम रंगमंच पर रविवार को रामलीला के मंचन के दौरान भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। अवकाश का दिन होने के कारण रामलीला प्रांगण श्रद्धालुओं और दर्शकों से खचाखच भरा रहा। राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने श्रीराम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध और सुंदरकांड के प्रसंगों का मंचन कर दर्शकों को रामचरितमानस की चौपाइयों के माध्यम से भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
रामलीला के दौरान महापौर अनुसुईया गोस्वामी, महिला नागरिक सहकारी बैंक की अध्यक्ष मंजू निराला, हितकारी विद्यालय सहकारी शिक्षा समिति के निदेशक संजू बिरला, मंजू बिरला, संतोष मरचुनिया, रचना पंडोतिया, कोटा उपभोक्ता होलसेल भण्डार लि. की निदेशक निशा काबरा और महिला नागरिक सहकारी बैंक की पूर्व निदेशक नीता दीपपुरा ने रामजानकी और लखन के प्रतिरूपों के साथ मानस का पूजन किया। इसके बाद पार्षद ओमप्रकाश काबरा, सामाजिक कार्यकर्ता, पार्षद सीमा चौधरी, प्रमिला वर्मा, पुरुषोत्तम यादव, कौशल शर्मा, सुनीता नायक, विकास दाधीच, पूर्व पार्षद रेखा गोस्वामी, समाजसेवी सुमित जांगिड़ और रामावतार विजय ने आरती की।
रामलीला की शुरुआत श्रीराम और सुग्रीव के मैत्री प्रसंग से हुई। राघवेंद्र कला संस्थान के कलाकारों ने जीवंत अभिनय और संवाद अदायगी के जरिए प्रसंग को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद भगवान श्रीराम द्वारा अन्याय के विरुद्ध न्याय की विजय के प्रतीक बाली वध का मंचन किया गया। इस दृश्य के दौरान पूरा रामलीला प्रांगण ‘जय श्रीराम’ के जयकारों से गूंज उठा। कलाकारों ने इस प्रसंग के माध्यम से मित्रता, धर्म और नीति के महत्व को दर्शाया।
लीला के उत्तरार्ध में हनुमंत चरित्र और सुंदरकांड के प्रसंगों का भव्य मंचन हुआ। पवनपुत्र हनुमान के लंका प्रस्थान, सीता माता की खोज और अशोक वाटिका में संवाद जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों को कलाकारों ने रामचरितमानस की सुमधुर चौपाइयों के माध्यम से जीवंत किया। शास्त्रीय और लोक धुनों पर प्रस्तुत चौपाइयों ने दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराई और पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना दिया। सुंदरकांड की चौपाइयों के दौरान श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए।
रविवार का अवकाश होने के कारण शाम होते ही श्रीराम रंगमंच का पूरा परिसर दर्शकों से भर गया। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने रामलीला के प्रत्येक प्रसंग का आनंद लिया। मेला समिति की ओर से सुरक्षा और बैठने की माकूल व्यवस्था की गई थी। हर दृश्य के समापन पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
महापौर अनुसुईया गोस्वामी ने कहा कि रामलीला आज भी हमारी संस्कृति और आस्था का अटूट हिस्सा है। श्रीराम-सुग्रीव मैत्री, बाली वध, हनुमंत चरित्र और सुंदरकांड के मंचन के माध्यम से श्रीराम रंगमंच पर आयोजित रामलीला ने दर्शकों को धर्म, नीति और भक्ति से जुड़े प्रसंगों से जोड़ा।