कोटा में नि:शुल्क वितरण के लिए तैयार किए गए इको फ्रेंडली रावण के पुतले।

कोटा में इस वर्ष दशहरे पर पर्यावरण संरक्षण और वैदिक परंपरा के समन्वय के साथ 15 फीट ऊंचे इको फ्रेंडली रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। सर्व हिंदू समाज सोशल क्रांतिकारी महासंघ की ‘पर्यावरण संरक्षण प्रहरी कोटा’ मुहिम के अंतर्गत तृतीय चरण में स्थापित ‘इको फ्रेंडली रावण दहन क्लब’ की ओर से 20 अक्टूबर 2026 को गुरुधाम कॉलोनी, रोटेदा रोड, कोटा जंक्शन पर वैदिक रीति से रावण दहन यानी अंतिम संस्कार संपन्न कराया जाएगा।

महासंघ के मुख्य संयोजक अध्यक्ष गोविंद नारायण अग्रवाल के संयोजन में तैयार इस विशेष पुतले पर कुल 80,000 रुपए की लागत आई है। इसके भव्य श्रृंगार में 35,000 रुपए मूल्य के मखमली, रेशमी वस्त्रों और जरी का उपयोग किया गया है। संस्थापक महामंत्री एवं प्रवक्ता राजाराम जैन 'कर्मयोगी' (रावण सरकार) ने बताया कि सनातन धर्म और वाल्मीकि रामायण की मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के पश्चात शत्रुता समाप्त हो जाती है। इसी भावना के अनुरूप रावण का दहन वैदिक विधि-विधान से अंतिम संस्कार के रूप में किया जाएगा।

इस आयोजन में प्रकांड कर्मकांडी पंडित विनीत शर्मा एवं उनका समूह वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अनुष्ठान संपन्न कराएगा। पर्यावरण-अनुकूल वैदिक प्रक्रिया के तहत रावण दहन में 1 पीपा देसी घी (नारियल सहित), 11 किलोग्राम हवन सामग्री, 5 किलोग्राम चंदन की लकड़ी, 1 किलोग्राम कपूर, 2 किलो अगर-तगर और 1 किलो गूगल का उपयोग किया जाएगा।

रावण दहन से पहले ‘राम कला संस्थान’ के निदेशक दीपक शर्मा और उनके कलाकार समूह द्वारा प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान, अंगद एवं जामवंत की लीलाओं के साथ रावण वध का जीवंत मंचन किया जाएगा।

इको फ्रेंडली रावण दहन क्लब के मुख्य संरक्षक अध्यक्ष डॉ. एमएल अग्रवाल एवं मुख्य संरक्षक डॉ. अरुणा अग्रवाल ने बताया कि नई पीढ़ी में पर्यावरण-अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने के संस्कार विकसित करने के उद्देश्य से क्लब की ओर से 7 फीट ऊंचे 10 इको फ्रेंडली रावण के पुतले नि:शुल्क वितरित किए जा रहे हैं। इनका वितरण 19 अक्टूबर दोपहर 12 बजे से 20 अक्टूबर दोपहर 12 बजे तक घोड़े वाले चौराहे के पास किया जाएगा।

पुतला प्राप्त करने के इच्छुक नागरिक और संस्थाएं महासंघ के हेल्पलाइन नंबर 9829328525 पर संपर्क कर सकते हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए गुरुधाम शाखा अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा एवं महिला शाखा अध्यक्ष नीलम शर्मा ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने का आह्वान किया है। वैदिक मंत्रोच्चार, पारंपरिक लीलाओं के मंचन और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के उपयोग के साथ यह आयोजन रावण दहन को एक विशिष्ट धार्मिक एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी पहल के रूप में प्रस्तुत करेगा।

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