तस्वीर में ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर हल्के पीले रंग की जैकेट पहने हुए नजर आ रहे हैं.   

कोटा/सांगोद, 1 अक्टूबर। देश में तेजी से बढ़ रही अक्षय ऊर्जा क्षमता को विद्युत ग्रिड से जोड़ने और उसके निर्बाध निकास के लिए केन्द्र सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC-III) को प्रधानमंत्री समन्वित एवं त्वरित नवीकरणीय ऊर्जा पहुंच योजना के रूप में आगे बढ़ाते हुए ₹1,86,405 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत देशभर में 135 गीगावाट तक नवीकरणीय ऊर्जा के निकास, 51,126 सर्किट किलोमीटर प्रसारण लाइनों, 2,28,903 एमवीए उपकेन्द्र क्षमता और 50 गीगावाट घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने का प्रावधान है।

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रयासों से नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल राजस्थान इस योजना के प्रमुख लाभार्थी राज्यों में रहेगा। केन्द्रीय विद्युत प्राधिकरण की प्रसारण योजना में राजस्थान के लिए हरित ऊर्जा गलियारा GEC-III के तहत लगभग 13,255 मेगावाट अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा के राज्यांतर्गत निकास, 5,963 सर्किट किलोमीटर प्रसारण लाइनों और 35,090 एमवीए उपकेन्द्र क्षमता का प्रस्ताव है।

इसके तहत 765 केवी जीएसएस के 7, 400 केवी जीएसएस के 3 और 220 केवी जीएसएस के 5 तथा संबंधित लाइनों का निर्माण किया जाएगा। इन जीएसएस और संबंधित लाइनों के निर्माण की अनुमानित लागत 22,000 करोड़ रुपये प्रस्तावित है, जिसमें से लगभग 6,000 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता केन्द्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी।

मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि इससे विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान में विकसित हो रही विशाल सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली को राज्य के विभिन्न हिस्सों तथा राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड तक पहुंचाने के लिए प्रसारण तंत्र को और मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

राजस्थान देश के प्रमुख नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन केन्द्रों में शामिल है। भडला, रामगढ़, फतेहगढ़, पूगल (बीकानेर), जैसलमेर-बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाएं विकसित हो रही हैं। बढ़ती उत्पादन क्षमता के साथ बिजली के समयबद्ध और पर्याप्त निकास के लिए मजबूत प्रसारण तंत्र आवश्यक है।

योजना के तहत प्रस्तावित नई प्रसारण लाइनों और उपकेन्द्रों से सौर और पवन ऊर्जा के निकास की क्षमता बढ़ेगी। पश्चिमी राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों से उत्पादित बिजली को विद्युत भार केन्द्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत होगी और प्रसारण गलियारों में विद्युत कटौती की समस्या कम करने में मदद मिलेगी। इससे राज्य के प्रसारण तंत्र की विश्वसनीयता और लचीलापन बढ़ेगा तथा भविष्य में स्थापित होने वाली बड़ी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं को विद्युत ग्रिड से जोड़ने में सुविधा होगी।

बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली से दिन के समय उपलब्ध सौर ऊर्जा को बेहतर ढंग से ग्रिड में समाहित करने तथा गैर-सौर घंटों में बिजली की उपलब्धता और ग्रिड संतुलन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

ऊर्जा मंत्री नागर ने कहा कि राजस्थान में बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित होने के कारण हरित ऊर्जा गलियारा GEC-III राज्य के लिए विशेष महत्व रखता है। केन्द्र और राज्य में एक ही सरकार होने से बेहतर समन्वय तथा राज्य की प्रसारण संस्था राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड द्वारा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से राजस्थान में हरित ऊर्जा के निकास के लिए आवश्यक प्रसारण ढांचे को और अधिक गति मिलेगी।

यह समन्वित प्रयास राजस्थान को नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन केन्द्र के रूप में बनाए रखने के साथ यहां उत्पादित हरित ऊर्जा को सुरक्षित, विश्वसनीय और निर्बाध रूप से राज्य तथा देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

राजस्थान में पहले से ही हरित ऊर्जा गलियारे के तहत प्रसारण तंत्र विकसित किया जा रहा है। भारत सरकार के अनुसार, हरित ऊर्जा गलियारा GEC-II के अंतर्गत राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड द्वारा 659 सर्किट किलोमीटर प्रसारण लाइन और 2,191 एमवीए उपकेन्द्र क्षमता के माध्यम से 2,478 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के निकास की व्यवस्था की जा रही है।

GEC-III के प्रस्ताव से राजस्थान की बढ़ती सौर और पवन ऊर्जा क्षमता को मजबूत प्रसारण तंत्र से जोड़ने की दिशा में विस्तार होगा। इससे पश्चिमी राजस्थान के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों से राज्य के प्रमुख विद्युत भार केन्द्रों तक हरित ऊर्जा के निकास को मजबूती मिलेगी और राजस्थान की पहचान हरित ऊर्जा उत्पादन केन्द्र के साथ मजबूत हरित ऊर्जा प्रसारण केन्द्र के रूप में भी सुदृढ़ होगी।

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