भारतीय रेल: जून में माल ढुलाई और यात्री संख्या में बड़ी वृद्धि

माल ढुलाई में 4 प्रतिशत की वृद्धि और राजस्व में 430 करोड़ का उछाल। वंदे भारत और अमृत भारत सेवाओं के विस्तार से यात्रियों को मिली बेहतर सुविधा।

Update: 2026-07-03 07:20 GMT

भारतीय अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली भारतीय रेल ने जून 2026 में अपनी परिचालन क्षमता का एक नया मानक स्थापित करते हुए विकास के पथ पर तेज गति से दौड़ना जारी रखा है। देश के विकास इंजन के रूप में अपनी भूमिका को और अधिक सुदृढ़ करते हुए, भारतीय रेल ने जून महीने में न केवल माल ढुलाई के आंकड़ों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, बल्कि यात्री यातायात में भी निरंतरता और स्थिरता बनाए रखी है। यह उपलब्धि न केवल रेलवे के कुशल प्रबंधन को दर्शाती है, बल्कि भारत के आर्थिक परिदृश्य में रेल तंत्र की अपरिहार्य प्रासंगिकता को भी प्रमाणित करती है।

जून 2026 के दौरान भारतीय रेल ने 142.21 मिलियन टन माल ढुलाई का कीर्तिमान हासिल किया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 136.71 मिलियन टन के आंकड़ों की तुलना में 4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। इस परिचालन दक्षता का सकारात्मक प्रभाव राजस्व पर भी पड़ा है, जिससे जून 2025 की तुलना में लगभग 430 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व अर्जित हुआ है। प्रमुख वस्तुओं की ढुलाई में आए उछाल ने औद्योगिक गतिविधियों की गति को स्पष्ट किया है। विशेष रूप से उर्वरक क्षेत्र में 19.1 प्रतिशत, अन्य वस्तुओं में 17.3 प्रतिशत, लौह अयस्क में 9.4 प्रतिशत और क्लिंकर के परिवहन में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, घरेलू कोयले की ढुलाई में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि और बिजली संयंत्रों को 7 प्रतिशत अधिक कोयले की आपूर्ति ने ग्रीष्मकालीन मांग के दौरान देश में बिजली उत्पादन को निर्बाध बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में कुल 419.08 मिलियन टन माल की ढुलाई के साथ भारतीय रेल ने पिछले वित्त वर्ष के इसी कालखंड के प्रदर्शन को पीछे छोड़ दिया है।

माल ढुलाई के साथ-साथ यात्री सुविधाओं के मोर्चे पर भी भारतीय रेल ने अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है। जून 2026 में कुल 63.81 करोड़ यात्रियों ने रेल मार्ग से यात्रा की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 62.37 करोड़ यात्रियों से अधिक है। उपनगरीय और लंबी दूरी की सेवाओं में यात्रियों का निरंतर विश्वास रेलवे की सुलभता का प्रमाण है। यात्री सेवाओं के आधुनिकीकरण के क्रम में वंदे भारत ट्रेनों की संख्या बढ़कर 164 हो गई है, जिसमें हावड़ा और कामाख्या के बीच शुरू की गई नई स्लीपर सेवा शामिल है। साथ ही, 72 अमृत भारत सेवाओं के माध्यम से रेलवे आम आदमी को सुरक्षित, किफायती और अत्याधुनिक यात्रा अनुभव प्रदान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

भारतीय रेल की यह निरंतर वृद्धि न केवल परिचालन दक्षता में सुधार का परिणाम है, बल्कि यह देश की बदलती आवश्यकताओं के प्रति रेलवे की ग्राहक-केंद्रित पहल को भी रेखांकित करती है। क्षमता वर्धन और आधुनिक रेल अवसंरचना के विकास के माध्यम से, भारतीय रेल न केवल भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रही है, बल्कि भारत के सतत आर्थिक विकास में भी एक आधारभूत स्तंभ के रूप में अपनी भूमिका निभा रही है।

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