सादुलपुर रेलवे स्टेशन का अमृत भारत योजना में कायाकल्प, पर्यटन-व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत सादुलपुर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास लगभग पूरा हो चुका है। आधुनिक सुविधाओं के साथ पर्यटन, व्यापार और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा।
तस्वीर में दिख रही सादुलपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन की नई मुख्य इमारत और मुख्य प्रवेश द्वार, जहां कुछ यात्री स्टेशन के अंदर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
सादुलपुर रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकास कार्य लगभग पूरा हो चुका है। उत्तर पश्चिम रेलवे के अनुसार इस पुनर्विकास से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, आवागमन अधिक सुगम बनेगा तथा स्थानीय व्यापार और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है। बीकानेर के महाराजा सादुल सिंह के नाम पर रखा गया सादुलपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन चुरू जिले का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन है और यह दिल्ली-रेवाड़ी-लोहारू-सादुलपुर-चुरू-बीकानेर तथा हिसार-सादुलपुर-चुरू-जोधपुर रेल मार्ग पर स्थित है।
सादुलपुर कमोडिटी ट्रेडिंग के लिए एक महत्वपूर्ण थोक बाजार के रूप में जाना जाता है। यहां कमोडिटी उत्पादों का व्यापार स्थानीय लोगों के लिए लंबे समय से प्रमुख व्यवसाय रहा है। सादुलपुर की अनाज मंडी इस क्षेत्र में कृषि व्यापार का अहम केंद्र है। इसके साथ ही शेखावाटी क्षेत्र की पहचान मानी जाने वाली बारीक फ्रेस्को पेंटिंग से सजी हवेलियां और पारंपरिक इमारतें भी यहां की प्रमुख विशेषता हैं।
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी श्री अमित सुदर्शन के अनुसार हस्तशिल्प कला एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण सादुलपुर रेलवे स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास लगभग पूर्ण हो चुका है। उन्होंने बताया कि स्टेशन के पुनर्विकसित होने से यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, आवागमन सुगम होगा तथा व्यापारी वर्ग भी लाभान्वित होगा।
पुनर्विकास कार्यों के तहत स्टेशन भवन में बड़े स्तर पर सुधार किया गया है। स्टेशन तक आने-जाने वाले मार्ग पर प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था विकसित की गई है। इसके अलावा बाउंड्री वॉल, सर्कुलेटिंग एरिया का सौंदर्यीकरण, दोपहिया और चौपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग पार्किंग सुविधा, बुकिंग ऑफिस, रिटायरिंग रूम में सुधार तथा नए टॉयलेट ब्लॉक्स का निर्माण किया जा रहा है।
लगभग 18.70 करोड़ रुपये की लागत से किए जा रहे इन पुनर्विकास कार्यों में एलईडी लाइटिंग के माध्यम से स्टेशन का सौंदर्यवर्धन भी किया जाएगा। सभी सुविधाओं को दिव्यांगजनों तक सुगमता से पहुंचाने के लिए उपयुक्त साइनेज लगाए जाएंगे। स्टेशन की दीवारों और छतों पर स्थानीय कला एवं संस्कृति को प्रदर्शित करने वाली आकर्षक पेंटिंग भी बनाई जाएगी।
यात्री सूचना प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए कोच गाइडेंस डिस्प्ले बोर्ड, मल्टीलाइन डिस्प्ले बोर्ड, सिंगल लाइन डिस्प्ले बोर्ड, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, बड़े एलईडी स्क्रीन तथा जीपीएस आधारित डिजिटल क्लॉक भी स्थापित किए जाएंगे। स्टेशन पर 12 मीटर चौड़ा पैदल पुल भी बनाया जा रहा है, जिसका 75 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इस पैदल पुल की अनुमानित लागत लगभग 8.84 करोड़ रुपये है।
स्टेशन की प्रकाश व्यवस्था तथा सुगम, निर्बाध एवं निरंतर तकनीकी रेल संचालन को ध्यान में रखते हुए हरित ऊर्जा उत्पादन के लिए सोलर ऊर्जा प्लांट भी स्थापित किया गया है। लगभग 18 लाख रुपये की लागत से 40 किलोवाट क्षमता का सोलर प्लांट लगाया गया है।
रेलवे के अनुसार स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों से स्थानीय कारीगरों और मजदूरों को रोजगार मिला है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हुई है। साथ ही स्टेशन के आधुनिक स्वरूप में विकसित होने से पर्यटन, स्थानीय हस्तशिल्प कला और क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। इससे क्षेत्र की लोकप्रियता बढ़ने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और सादुलपुर क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी।