PM मोदी राष्ट्र को समर्पित करेंगे पचपदरा रिफाइनरी, देश को मिलेगी नई ऊर्जा ताकत

एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी 79,459 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हुई है, जिससे देश की ईंधन क्षमता मजबूत होगी और 1.35 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

Update: 2026-07-03 09:06 GMT

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 4 जुलाई (शनिवार) को बालोतरा के पचपदरा से भारत की प्रथम ग्रीनफील्ड एकीकृत रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स, एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी, राष्ट्र को समर्पित करेंगे। दुनिया की सबसे उन्नत रिफाइनरियों में शामिल यह परियोजना देश के पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, जो भारत की ईंधन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेगी।

हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड तथा राजस्थान सरकार के संयुक्त उद्यम के रूप में विकसित 9 एमएमटीपीए क्षमता वाली ग्रीनफील्ड रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स 79 हजार 459 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित की गई है। इस परियोजना में 2.4 एमएमटीपीए पेट्रोकेमिकल क्षमता के साथ रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल उत्पादन को एकीकृत किया गया है। रिफाइनरी में क्रूड ऑयल से विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन भी प्रारंभ हो चुका है।

राजस्थान के क्रूड तथा आयातित क्रूड के मिश्रण को प्रोसेस्ड करने के लिए इस रिफाइनरी को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ डिजाइन किया गया है। इसका नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17.0 है, जो इसे अत्यधिक उन्नत श्रेणी की रिफाइनरियों में शामिल करता है। साथ ही, इसमें 26 प्रतिशत से अधिक पेट्रोकेमिकल उत्पादन क्षमता है, जो दक्षता और संधारणीयता के वैश्विक मानकों के अनुरूप है।

यह कॉम्प्लेक्स भारत की ईंधन क्षमता को सुदृढ़ बनाने, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने तथा औद्योगिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही यह पेट्रोकेमिकल एवं प्लास्टिक पार्क के विकास के लिए आधारभूत उद्योग के रूप में कार्य करेगा, जिससे डाउनस्ट्रीम उद्योगों तथा अनुषंगी क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। राजस्थान रिफाइनरी परियोजना एमएसएमई, पैकेजिंग, टेक्सटाइल, ऑटो पार्ट्स और एग्री-फिल्म्स जैसे उद्योगों को भी सशक्त करेगी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

राजस्थान की रेतीली धरती पर निर्मित यह परियोजना इंजीनियरिंग और निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके निर्माण के लिए डेढ़ करोड़ घन मीटर मिट्टी हटाई गई, जो गीजा के पिरामिड से छह गुना अधिक है। परियोजना में 16 लाख घन मीटर कंक्रीट का उपयोग किया गया, जो बुर्ज खलीफा से पांच गुना अधिक है। राजस्थान रिफाइनरी में एफिल टॉवर से 40 गुना अधिक, करीब तीन लाख मीट्रिक टन स्टील का उपयोग हुआ है। इसमें बिछाई गई 28 हजार किलोमीटर लंबी केबल पृथ्वी के व्यास से भी दोगुनी है, जबकि रिफाइनरी में स्थापित 125 मीटर ऊंचा कोक डोम गोल गुम्बज से तीन गुना बड़ा है।

यह परियोजना रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण साबित हुई है। इसके निर्माण चरण में लगभग 35 हजार श्रमिकों को रोजगार मिला, जबकि सहायक क्षेत्रों में लगभग एक लाख अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। इस प्रकार परियोजना से कुल लगभग एक लाख 35 हजार रोजगार का सृजन हुआ है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी के राष्ट्र को समर्पित होने के साथ विकसित भारत की परिकल्पना को नई मजबूती मिलेगी। यह परियोजना देश की ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोकेमिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, औद्योगिक विस्तार, रोजगार सृजन और संधारणीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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