धनतेरस पर 6 नवंबर को शुक्र प्रदोष का दुर्लभ संयोग, शिव पूजा का मिलेगा विशेष फल
धनतेरस 6 नवंबर 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। टोंक के ज्योतिषाचार्य बाबूलाल शास्त्री ने त्रयोदशी तिथि, शिव पूजा के शुभ मुहूर्त, चौघड़िया, हस्त नक्षत्र और व्रत की पूजा विधि की जानकारी दी।
टोंक स्थित मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान के निदेशक बाबूलाल शास्त्री, जिन्होंने धनतेरस पर बनने वाले शुक्र प्रदोष व्रत के शुभ मुहूर्त की जानकारी दी।
टोंक में इस बार धनतेरस के अवसर पर शुक्र प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। शुक्रवार को त्रयोदशी तिथि पड़ने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन भगवान शिव की आराधना के साथ मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का भी विशेष संयोग रहेगा। ऐसे में 6 नवंबर 2026 को धनतेरस पर शिव आराधना और प्रदोष व्रत का विशेष धार्मिक महत्व रहेगा।
मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार, कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को होने के कारण शुक्र प्रदोष व्रत इसी दिन रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि 6 नवंबर को प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इसकी अवधि 2 घंटे 37 मिनट बताई गई है। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 52 मिनट से 5 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
पंचांग के अनुसार, चर चौघड़िया सुबह 06:43 से 08:05 बजे तक, लाभ-अमृत का समय सुबह 08:05 से 10:48 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक और शुभ चौघड़िया दोपहर 12:10 से 01:32 बजे तक रहेगा। इसके बाद चर चौघड़िया शाम 04:15 से 05:37 बजे तक और लाभ चौघड़िया रात 08:54 से 10:22 बजे तक रहेगा।
इस दिन हस्त नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा रहेंगे। हस्त नक्षत्र सूर्योदय से अर्धरात्रि के बाद 04:43 बजे तक रहेगा। साथ ही कन्या राशि का चंद्रमा रहेगा।
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि इस बार शुक्र प्रदोष व्रत के दिन धनतेरस का भी संयोग बन रहा है। इस अवसर पर मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा के साथ भगवान शिव की आराधना भी की जाएगी। प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से भक्तों को सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से जीवन की परेशानियों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति होने की मान्यता है।
प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए और भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लेना चाहिए। शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, बेलपत्र और फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना चाहिए तथा व्रत कथा पढ़नी या सुननी चाहिए। अंत में भगवान शिव की आरती कर सुख-समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि धनतेरस और शुक्र प्रदोष का यह संयोग भगवान शिव के साथ मां लक्ष्मी, गणेश और कुबेर की आराधना का अवसर प्रदान करेगा। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान, दरबार सेकेंडरी स्कूल के सामने, सुभाष बाजार, टोंक से संपर्क किया जा सकता है। संपर्क नंबर 9413129502 है।