डूंगरपुर के एसबीपी कॉलेज ग्राउंड में पंचायती राज चुनाव प्रशिक्षण के दौरान हाथ में फ्रैक्चर और गले में पट्टा बांधकर पहुंचे शिक्षक, जिनकी गुहार के बावजूद चुनाव ड्यूटी निरस्त नहीं की गई थी।

डूंगरपुर में पंचायतीराज चुनाव के पहले चरण की तैयारियों के बीच मतदान दलों के अंतिम प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं और चुनाव ड्यूटी की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। एसबीपी कॉलेज ग्राउंड में प्रशिक्षण के बाद मतदान सामग्री लेकर जा रहे एक शिक्षक को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा। वह मुंह के बल नीचे गिर गए, जिससे उनकी नाक और मुंह पर चोट लगी और खून बहने लगा। इसके बावजूद करीब 20 मिनट तक न तो स्वास्थ्यकर्मी पहुंचे और न ही एंबुलेंस आई। आखिरकार घायल शिक्षक को तहसीलदार की गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं, एक अन्य शिक्षक हाथ में फ्रैक्चर होने के बावजूद प्लास्टर और गले में पट्टा बांधकर चुनाव ड्यूटी करने पहुंचे। उन्होंने पहले ही ड्यूटी निरस्त करने की गुहार लगाई थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली।

डूंगरपुर जिले की सात पंचायत समितियों में पहले चरण के तहत मतदान होना है। इसके लिए बुधवार को शहर के एसबीपी कॉलेज ग्राउंड में मतदान दलों का अंतिम प्रशिक्षण आयोजित किया गया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद मतदान दलों को रवाना किया जा रहा था और उन्हें ईवीएम सहित अन्य चुनाव सामग्री वितरित की जा रही थी। इसी दौरान एमजीजीएस गेजी के शिक्षक जितेंद्र ननोंमा सामग्री लेने के बाद अपने साथी मतदानकर्मियों के साथ जा रहे थे। तभी अचानक उन्हें मिर्गी का दौरा पड़ा और वे बेसुध होकर नीचे गिर गए। मुंह के बल गिरने से उनकी नाक और मुंह पर चोट लगी तथा खून बहने लगा। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। पुलिसकर्मियों और अन्य शिक्षकों ने उन्हें संभाला, लेकिन तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं हो सकी।

घटना के बाद करीब 20 मिनट तक घायल शिक्षक को चिकित्सा सहायता के लिए इंतजार करना पड़ा। इस दौरान न तो स्वास्थ्य टीम मौके पर पहुंची और न ही एंबुलेंस आई। घायल शिक्षक के साथी और अन्य कर्मचारी मदद मिलने की प्रतीक्षा करते रहे। बाद में मंच से माइक पर घोषणा की गई, जिसके बाद एडीएम मौके पर पहुंचे। उन्होंने घायल शिक्षक को तत्काल अस्पताल ले जाने के निर्देश दिए। इसके बाद तहसीलदार की जीप से उन्हें अस्पताल रवाना किया गया। घटना के बाद जितेंद्र ननोंमा की चुनाव ड्यूटी भी निरस्त कर दी गई।

इसी प्रशिक्षण के दौरान चुनाव ड्यूटी से जुड़ा एक और मामला सामने आया। साबला ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल सुखवेरा के शिक्षक राजदीप सिंह चौहान हाथ में प्लास्टर और गले में पट्टा बांधकर प्रशिक्षण में बैठे थे। उनका 15 सितंबर को एक्सीडेंट हो गया था, जिसमें उनके हाथ में फ्रैक्चर हुआ। चोट के बाद हाथ का ऑपरेशन कर प्लेट डालनी पड़ी थी और इसके बाद हाथ पर प्लास्टर चढ़ाया गया था।

चुनाव ड्यूटी लगाए जाने के बाद राजदीप सिंह चौहान 17 अक्टूबर को अपनी समस्या लेकर एडीएम के पास पहुंचे थे। उन्होंने डॉक्टर के दस्तावेज दिखाते हुए ड्यूटी निरस्त करने की गुहार लगाई थी, लेकिन उनकी फरियाद नहीं सुनी गई। इसके चलते उन्हें घायल हाथ के बावजूद चुनाव ड्यूटी के लिए पहुंचना पड़ा।

प्रशिक्षण के दौरान कलेक्टर समेत अन्य अधिकारी मंच पर मौजूद थे, जबकि राजदीप सिंह चौहान सामने ही कुर्सियों पर बैठे थे। हाथ में फ्रैक्चर, प्लास्टर और गले में पट्टा होने के बावजूद उनकी चुनाव ड्यूटी निरस्त नहीं किए जाने से व्यवस्था पर सवाल उठे। एक ओर मिर्गी का दौरा पड़ने से घायल शिक्षक को करीब 20 मिनट तक चिकित्सा सहायता नहीं मिली, वहीं दूसरी ओर फ्रैक्चर से जूझ रहे शिक्षक को भी ड्यूटी से राहत नहीं मिल सकी। इन दोनों घटनाओं ने डूंगरपुर में मतदान दलों के अंतिम प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं और चुनाव ड्यूटी संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए।

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