पुरुषार्थ और कर्म के बिना जीवन अधूरा, मुनिश्री निश्चल ने श्रावकों को दिया संदेश
निकुंभ के समता भवन में 27 दिनों से जारी प्रवचन श्रृंखला में मुनि निश्चल ने कर्म, पुरुषार्थ और आत्मसंयम का महत्व बताया।
तस्वीर में निकुंभ स्थित समता भवन के द्वार पर पीले और गुलाबी पारंपरिक वस्त्रों में नजर आ रहे श्रद्धालु।
निकुंभ कस्बे के समता भवन में विगत 27 दिनों से अनवरत चल रही प्रवचन श्रृंखला के दौरान शासन दीपक निश्चल मुनि मसा ने श्रावकों को कर्म, कर्तव्य और आत्मसंयम का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कर्म ही पूजा है और कर्तव्य को महत्व देने से जीवन संवर जाता है। कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और प्रामाणिकता के सहारे भारत पुनः विश्व गुरु की ख्याति प्राप्त कर सकता है।
मुनिश्री ने कहा कि मानव जीवन बड़े दुर्लभ यत्नों के बाद प्राप्त हुआ है। पुरुषार्थ और कर्म के बिना जीवन अधूरा है। भगवान महावीर, राम, कृष्ण और कबीर के जीवन से कर्म की परिभाषा को समझा जा सकता है। जिन्होंने इन महापुरुषों के जीवन चरित्र अथवा दर्शन को आत्मसात कर अपने जीवन को संवारने का प्रयास किया है, वही व्यक्ति मनुष्य जन्म की सार्थकता का एहसास कर सकता है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जीवन में बुरी आदतों को छोड़ने की क्षमता रखता है, वह अपने जीवन का स्वयं मालिक है। वहीं जो व्यक्ति लालच में आकर बहुत कुछ पाने की आकांक्षा रखता है, वह सही मायने में आज भी अपने मन का गुलाम है। मन पर नियंत्रण रखकर ईश्वर की खोज और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग अपनाकर मनुष्य अपने बहुमूल्य जीवन को संवार सकता है।
मुनिश्री ने बताया कि मनुष्य को पहले स्वयं को पहचानना चाहिए और उसके बाद जीवन की जटिलताओं को समझने का प्रयास करना चाहिए। तभी उसका कल्याण संभव है। इस दौरान संघ के पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी प्रदान की। उपस्थित सनातन श्रावकों ने भी मुनिश्री का आशीर्वाद ग्रहण किया।
सनातन श्रावक प्रेम सिंह सिसोदिया ने प्रतिदिन अधिक से अधिक संख्या में श्रावकों से मुनिश्री के प्रवचन सुनने के लिए प्रातः 9 बजे समता भवन पहुंचने का आग्रह किया। 27 दिनों से जारी प्रवचन श्रृंखला में कर्म, पुरुषार्थ और आत्मसंयम को जीवन की सार्थकता से जोड़ते हुए दिए गए संदेश ने श्रावकों को अपने जीवन में कर्तव्यनिष्ठा और आत्मनियंत्रण अपनाने का आह्वान किया।