बेगूं में आरक्षण के बाद बढ़ी टिकट की जंग, सुरक्षित वार्डों पर दावेदारों की नजर
बेगूं नगर पालिका चुनाव में आरक्षण के बाद टिकट की दौड़ तेज हो गई है। भाजपा में दावेदारों की लंबी कतार और कांग्रेस में मजबूत प्रत्याशियों की तलाश के बीच सुरक्षित वार्डों को लेकर राजनीतिक समीकरण बदलने लगे हैं।
तस्वीर में बेगूं नगर पालिका मंडल का कार्यालय भवन और परिसर नजर आ रहा है।
बेगूं। नगर निकाय चुनाव की रणभेरी बजने और वार्डों का आरक्षण तय होने के साथ ही बेगूं में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशी अब अपने लिए अनुकूल और सुरक्षित वार्ड तलाशने में जुट गए हैं। अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित होने के कारण सामान्य और सामान्य महिला वार्डों में टिकट को लेकर सबसे अधिक खींचतान दिखाई दे रही है। दोनों प्रमुख दलों के नेता वार्डवार राजनीतिक समीकरण साधने में जुटे हैं।
बेगूं नगर पालिका में 15 वार्ड अनारक्षित ओपन तथा 7 वार्ड अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित हैं। अनारक्षित ओपन वार्डों में वार्ड संख्या 1, 3, 9, 11, 12, 15, 16, 19, 21, 23, 24, 26, 33, 34 और 35 शामिल हैं। वहीं अनारक्षित महिला वार्डों में 2, 8, 10, 22, 25, 27 और 31 शामिल हैं। आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद इन वार्डों में संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ गई है।
चुनावी चर्चाओं के बीच सबसे अधिक चर्चा निवर्तमान पालिका अध्यक्ष के वार्ड बदलने को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि वर्तमान वार्ड में चुनावी समीकरण उनके लिए अपेक्षाकृत असहज नजर आ रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा भी किसी सुरक्षित और अनुकूल वार्ड की तलाश किए जाने की अटकलें तेज हैं।
हालांकि वार्ड बदलने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है, लेकिन शहर में इसे लेकर राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। यदि निवर्तमान अध्यक्ष वार्ड बदलती हैं तो संबंधित वार्डों में पहले से तैयारी कर रहे दावेदारों के समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं। यही वजह है कि संभावित प्रत्याशियों की नजर अब केवल आरक्षण पर नहीं, बल्कि प्रमुख नेताओं और दावेदारों की वार्डवार रणनीति पर भी टिकी हुई है।
सत्तारूढ़ भाजपा में सामान्य और सामान्य महिला वार्डों में टिकट के लिए दावेदारों की संख्या अधिक बताई जा रही है। कई वार्डों में दो से तीन दावेदार सक्रिय हैं और अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए मतदाताओं तथा वार्ड के प्रमुख लोगों से संपर्क कर रहे हैं। अध्यक्ष पद को लेकर भी संभावित दावेदार अपने-अपने राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुटे हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा में पर्यवेक्षक और प्रभारी तय किए जा चुके हैं। आगामी दिनों में वार्ड प्रभारी दावेदारों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की रिपोर्ट तैयार कर संगठन को सौंपेंगे। टिकट वितरण में इन रिपोर्टों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
इधर कांग्रेस नगर पालिका में दोबारा बोर्ड बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, लेकिन पार्टी के सामने गुटबाजी के साथ मजबूत प्रत्याशियों की तलाश भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। नगर में कांग्रेस के भीतर पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना और पूर्व विधायक राजेंद्र विधूड़ी के समर्थकों के अलग-अलग गुट माने जाते हैं।
कांग्रेस के लिए पिछला विधानसभा चुनाव भी बड़ी चुनौती के रूप में सामने है। विधानसभा चुनाव में पार्टी को करीब 52 हजार मतों के बड़े अंतर से मिली हार के बाद संगठन अभी तक पूरी तरह उभर नहीं पाया है। चुनावी हार के बाद से ही कांग्रेस में नेतृत्व और संगठनात्मक दिशा को लेकर असंतोष की चर्चाएं बनी हुई हैं। पूर्व विधायक राजेंद्र विधूड़ी के नेतृत्व को लेकर पार्टी के एक वर्ग में असंतोष की चर्चा भी लगातार राजनीतिक गलियारों में बनी हुई है। ऐसे में यदि गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर खींचतान दूर नहीं हुई तो इसका खामियाजा नगर निकाय चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है।
सूत्रों की मानें तो कांग्रेस को कई वार्डों में मजबूत और जिताऊ प्रत्याशी तलाशने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जबकि भाजपा के कई वार्डों में दावेदारों की संख्या अधिक बताई जा रही है। ऐसे में कांग्रेस के सामने एकजुटता बनाए रखने के साथ मजबूत उम्मीदवार उतारने की दोहरी चुनौती है।
आरक्षण के बाद अब शहर में टिकट की दौड़ ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। सुरक्षित वार्ड की तलाश, वार्ड बदलने की चर्चाएं, टिकट के लिए बढ़ती दावेदारी और नेताओं के बीच खेमेबंदी ने चुनावी शह-मात का खेल शुरू कर दिया है। अब सभी की नजर टिकट वितरण पर है। टिकट के बाद सामने आने वाले बागी और निर्दलीय उम्मीदवार भी दोनों दलों के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। आगामी दिनों में तस्वीर और साफ होगी कि कौन सा दावेदार किस वार्ड से मैदान में उतरता है और कौन सा राजनीतिक समीकरण चुनावी बाजी पलटता है।