भीलवाड़ा में इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं, आकृति कला संस्थान की पहल
मोलेला की प्राकृतिक मिट्टी से बनी 800 प्रतिमाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिसका उद्देश्य जल प्रदूषण रोकना और लोक कलाकारों को आर्थिक सहयोग देना है।
तस्वीर में चार युवा कलाकार मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमाएं हाथों में थामे खड़े हैं।
भीलवाड़ा में गणेश चतुर्थी के अवसर पर आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की तैयारी है। आकृति कला संस्थान की ओर से 14 सितंबर को शहरवासियों के लिए 100 प्रतिशत प्राकृतिक मिट्टी से निर्मित लगभग 800 इको फ्रेंडली भगवान गणेश की प्रतिमाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। संस्थान की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ लोक कला को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से की जा रही है।
इन गणेश प्रतिमाओं को खमनोर स्थित मोलेला की प्रसिद्ध प्राकृतिक मिट्टी से तैयार किया गया है। प्रसिद्ध लोक कलाकार नारायण लाल कुम्हार ने पारंपरिक कला एवं शिल्प तकनीक से इन प्रतिमाओं का निर्माण किया है। प्रतिमाएं लगभग 6 इंच से लेकर 2 फीट तक के विभिन्न आकारों में उपलब्ध रहेंगी, जिससे श्रद्धालु अपनी सुविधा और घर में स्थापना के अनुरूप गणेश प्रतिमा का चयन कर सकेंगे।
आकृति कला संस्थान के सचिव कैलाश पलिया के अनुसार, संस्थान पिछले 8 वर्षों से लगातार भीलवाड़ा में इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध कराकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। संस्थान का उद्देश्य केवल गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि समाज में मिट्टी के महत्व, लोक कला और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना भी है।
संस्थान का मानना है कि भगवान गणेश की पूजा प्रकृति के साथ जुड़कर होनी चाहिए। प्लास्टर ऑफ पेरिस से निर्मित प्रतिमाओं के विसर्जन से जल स्रोतों में प्रदूषण बढ़ता है और जलीय पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसके विपरीत प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं पर्यावरण के अनुकूल होती हैं और जल एवं प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना पुनः मिट्टी में विलीन हो जाती हैं।
इस पहल के पीछे राजस्थान के पारंपरिक लोक कलाकारों एवं कुम्हार समुदाय को आर्थिक सहयोग देने और उनकी कला को बाजार उपलब्ध कराने का उद्देश्य भी है। मोलेला की पारंपरिक मिट्टी कला अपनी विशिष्ट पहचान के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इसी लोक परंपरा से जुड़े कलाकारों द्वारा तैयार की गई गणेश प्रतिमाओं को भीलवाड़ा के लोगों तक पहुंचाकर संस्थान लोक कलाकारों की मेहनत और हुनर को सम्मान देने का प्रयास कर रहा है।
इस आयोजन को सफल बनाने में शहर के युवा कलाकारों की भी सक्रिय भूमिका है। अनु प्रजापत, अनुष्का पाराशर, शांतिलाल गाडरी और उमंग उपाध्याय सहित युवा कलाकारों के प्रयास लगातार रंग ला रहे हैं। युवा कलाकार लोगों को इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं और गणेश उत्सव को पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाने का संदेश दे रहे हैं।
आकृति कला संस्थान का यह प्रयास कला, संस्कृति, आस्था और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। संस्थान का संदेश है कि गणेश जी की स्थापना आस्था से करें, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं।
इको फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं 14 सितंबर, गणेश चतुर्थी के अवसर पर वकील कॉलोनी स्थित आकृति आर्ट गैलरी, भीलवाड़ा से प्राप्त की जा सकेंगी। विभिन्न आकारों में उपलब्ध इन प्रतिमाओं को घरों में गणेश स्थापना के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
आकृति कला संस्थान ने शहरवासियों से अपील की है कि इस गणेश चतुर्थी पर पीओपी की प्रतिमाओं के स्थान पर प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाएं, लोक कलाकारों को प्रोत्साहन दें और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। “मिट्टी से बने गणेश, प्रकृति के संग गणेश उत्सव” के संदेश के साथ संस्थान की यह पहल इस वर्ष भी गणेश उत्सव को पर्यावरण संरक्षण और लोक कला के सम्मान से जोड़ने का प्रयास करेगी।