आचार्य रामदयालजी महाराज बोले- अमृत नहीं दे सकते तो किसी को जहर देने का अधिकार नहीं
माणिक्यनगर रामद्वारा में आचार्य रामदयालजी महाराज ने वाणी, मर्यादा और राम नाम के महत्व पर संदेश दिया, 13 से 20 सितम्बर तक भागवत सप्ताह होगा।
तस्वीर में एक तरफ आचार्य रामदयालजी महाराज और दूसरी तरफ सत्संग में बैठे श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि आजादी के नाम पर स्वच्छन्द बनकर मर्यादाओं और संस्कृति की धज्जियां नहीं उड़ानी चाहिए। अहंकार में आकर मर्यादाओं का ध्यान नहीं रखने वालों को बाद में पछताना पड़ता है। भगवान ने वाणी दी है, इसलिए हमारी भाषा ऐसी होनी चाहिए जो सभी को प्रिय लगे। उन्होंने कहा कि शब्द कभी मरते नहीं, यही कारण है कि हजारों वर्ष बाद भी भगवान की वाणी गूंज रही है। अप्रिय शब्द बोलने के बजाय जुबान से भगवान का नाम लेना, भजन करना और सत्संग करना चाहिए।
ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने गुरुवार को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा कि हमेशा कोई भी शब्द सोच-समझकर बोलना चाहिए और शब्द उपासक बनना चाहिए। यदि आप अच्छा सुनना चाहते हैं तो अच्छा बोलना भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम किसी को अमृत नहीं दे सकते तो जहर देने के अधिकारी भी नहीं हैं। अहंकार में आकर हम कुछ भी कर लें, लेकिन परमात्मा क्षमा नहीं करता।
आचार्यश्री ने कहा कि कभी भी शास्त्रों की गलत व्याख्या नहीं करनी चाहिए और अवांछित बात नहीं बोलनी चाहिए। व्यक्ति की वाणी से ही उसके खानदान, संस्कार और गुणों का पता लगता है। मीठा बोलने से जीवन सुंदर बनता है, जबकि कड़वा और खराब बोलने से बदले की भावना जागृत होती है। जुबान से राम नाम जपने से जीवन का कल्याण हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कभी अज्ञान के कारण इतराना नहीं चाहिए। हमें शक्ति परमात्मा ने किसी को दुःख देने के लिए नहीं, बल्कि सुख पहुंचाने के लिए दी है। अपनी ध्वनि अच्छी रखो, ताकि प्रतिध्वनि भी अच्छी रहे।
आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि जीवन में कभी भी परमात्मा की आंखों में धूल झोंकने का पाप नहीं करना चाहिए। भगवान हमें सब कुछ देता है, फिर भी यदि हम कहते हैं कि हमारे पास कुछ नहीं है तो वास्तव में कुछ नहीं रह जाएगा। हमें बोलना चाहिए कि राम-गुरू की कृपा है और सब आनंद है, तो फिर आनंद ही रहेगा। जो प्राप्त है, उसे पर्याप्त मानना चाहिए। जिसके मन में राम के प्रति विश्वास है, फिर सब कुछ उसके पास है।
उन्होंने कहा कि जो दुनिया के सारे नियम मानता है, लेकिन आत्म धर्म की पालना, राम के प्रति प्रेम और भजन का नियम नहीं है, उसके बाकी सभी नियम व्यर्थ हैं। जिन्होंने राम नाम हृदय में धारण कर लिया और उसके प्रति दृढ़ श्रद्धा रखी, वह सबसे बड़ा पुण्यवान, बलवान और गुणवान होकर सौभाग्यशाली होता है।
आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में रामद्वारा में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत विश्व शांति एवं कल्याण की भावना से 13 से 20 सितम्बर तक विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन होगा। इसमें भागवत भक्ति, भक्त और भगवान पर चर्चा तथा जीवन दर्शन पर प्रवचन होंगे। इस दौरान 108 भागवत मूल पाठ का ऐतिहासिक आयोजन भी होगा। पुष्कर से आने वाले 108 वेदपाठी विद्वान पंडित भागवत का मूल पाठ करेंगे। इन 108 भागवत का पूजन 108 यजमान परिवार करेंगे।
इस सप्ताह प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा तथा सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। वाणीजी का प्रवचन आचार्य श्री रामदयालजी महाराज के मुखारबिंद से होगा। श्रीमद् भागवत कथा का वाचन संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना द्वारा किया जाएगा। इस आयोजन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु भीलवाड़ा आएंगे।