भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर की ज्ञान गंगा: मृत्यु को महोत्सव बनाने का दिया संदेश
भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान आचार्य पुलकसागर महाराज ने मृत्यु को महोत्सव बनाने का संदेश दिया। 28 अगस्त को 700 मुनियों की रक्षा के संकल्प के साथ विशेष आयोजन होगा।
तस्वीर में राष्ट्र संत आचार्य पुलकसागर महाराज भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान प्रवचन देते हुए नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 27 अगस्त। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिसने इस सृष्टि में जन्म लिया है, उसकी मृत्यु अवश्यंभावी है। जिंदगी मौत की अमानत है, इसलिए इसे संभालकर रखना चाहिए। मनुष्य को यह पता होना चाहिए कि उसके जीवन का उद्देश्य क्या है, क्योंकि बिना लक्ष्य के तो पशु भी जीते हैं। उन्होंने कहा कि जिंदगी से मृत्यु का मूल्य वसूल करो और मृत्यु को महोत्सव बनाने का प्रयास करो।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में गुरुवार को प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि कई भवों तक आत्मा तड़पी है, तब जाकर मानव चोला प्राप्त हुआ है। बुढ़ापे में मृत्यु नहीं सुधरने वाली, इसलिए जवानी में जिंदगी को सुधार लो, मृत्यु अपने आप सुधर जाएगी। जैसे हम जीएंगे, वैसी ही हमारी मृत्यु होगी। हम हंसकर जीए तो मृत्यु महोत्सव बन जाएगी और रो-रोकर जीए तो मृत्यु मातम बन जाएगी।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि कुछ लोग जीवन जीने की कला सिखाते हैं, लेकिन वे मृत्यु कैसे लानी है, यह सिखाते हैं। मनुष्य जन्म में कोई पद, प्रतिष्ठा, यश या धन प्राप्त कर सकेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। जिंदगी में कुछ मिले या न मिले, लेकिन मौत जरूर मिलेगी। दुनिया में अमर कोई नहीं है। राजा हो या रंक, सभी को यहां से जाना है। किसी की अर्थी देखकर यह नहीं कहना चाहिए कि यह चला गया, बल्कि यह सोचना चाहिए कि एक दिन मैं भी इसी तरह चला जाऊंगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया में कहीं भी चले जाओ, मृत्यु से कोई नहीं बच सकता। मृत्यु नहीं आई तो जिंदगी बोझ बन जाएगी। मौत हमें ले जाकर उपकार करती है। मौत मातम नहीं, महोत्सव हुआ करती है। मृत्यु नहीं होगी तो आत्मा को नया शरीर कहां से प्राप्त होगा। इसलिए मौत से डरना नहीं चाहिए, बल्कि उसे महोत्सव बनाने का प्रयास करना चाहिए।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि मृत्यु को महोत्सव बनाना है तो जिंदगी में दुश्मनों की संख्या घटाते और दोस्तों की संख्या बढ़ाते चलो। दुकान के साथ जिंदगी के बहीखाते भी मिलाते चलो। सोने से पहले जिंदगी का हिसाब-किताब सुधार लो। उन्होंने कहा, मौत से वही डरता है जिसके जिंदगी के बहीखाते गड़बड़ होते हैं। परनिंदा छोड़कर अपने भीतर झांकना शुरू कर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिंदगी एक किराए का घर है, जिसे एक दिन बदलना ही पड़ेगा। मौत जब तुझको आवाज देगी तो घर से बाहर निकलना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि हम जीवन भर कितनी भी धन-संपदा जोड़ लें, लेकिन याद रखें कि कफन में जेब नहीं होती। सब कुछ यहीं छूट जाएगा। खाली हाथ आए हैं और खाली हाथ ही जाना पड़ेगा। मरने के बाद केवल व्यक्ति का व्यवहार और चरित्र ही याद रहता है। इसलिए अपना व्यवहार ऐसा बनाओ कि किसी के दिल में छुपकर जिंदा रह सको।
प्रवचन से पहले दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट शास्त्रीनगर के पदाधिकारियों तथा आचार्य पुलकसागर के सांसारिक बहन मंजूदेवी एवं बहनोई शिरीष जैन ने प्राप्त किया। दिगम्बर जैन महासभा के अध्यक्ष सुनील जैन ने आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया। शास्त्रीनगर बालिका मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे।
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में 28 अगस्त को रक्षाबंधन पर विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसमें मुनि रक्षा का संकल्प लिया जाएगा। यह पर्व उन 700 मुनियों की रक्षा के उपलक्ष्य में मनाया जाएगा, जिन पर घोर उपसर्ग आया था। आयोजन के दौरान उसी ऐतिहासिक प्रसंग को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से सजीव मंचन किया जाएगा। इस अवसर पर मुनियों के प्रति अगाध श्रद्धा निवेदित करते हुए मंत्रोच्चार के साथ 700 श्रीफल समर्पित किए जाएंगे।
इस भव्य आयोजन के लिए श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति ने अध्यक्ष प्रवीण चौधरी के नेतृत्व में व्यापक तैयारियां की हैं। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।