भुसावर में सात दिवसीय संगीतमय शिवमहापुराण कथा का भव्य समापन, हवन यज्ञ में दी पूर्णाहुति
हिण्डोन सड़क मार्ग स्थित धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय शिव महापुराण कथा के अंतिम दिन हवन-यज्ञ और भंडारे का आयोजन किया गया।
भुसावर के सेठ गुजरमल चैरिटेबल ट्रस्ट धर्मशाला में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीशिव महापुराण कथा के समापन अवसर पर बुधवार को हवन-यज्ञ में आहुतियां देते श्रद्धालु।
भुसावर में सात दिवसीय संगीतमय श्रीशिव महापुराण कथा का समापन बुधवार, 7 अक्टूबर को वैदिक मंत्रोच्चार, हवन यज्ञ और पूजन के साथ हुआ। हिण्डोन सड़क मार्ग स्थित यूको बैंक के पास सेठ गुजरमल चैरिटेबल ट्रस्ट धर्मशाला में शिवसेवा मंडल के संयुक्त तत्वावधान में 30 सितम्बर से 06 अक्टूबर तक आयोजित कथा के समापन अवसर पर सैकड़ों शिव भक्तों ने जोड़े एवं एकल रूप में हवन यज्ञ में आहुतियां प्रदान कीं।
जयपुर से पधारे कथा वाचक जितेन्द्र जी महाराज ने कथा के दौरान भगवान शिव के विभिन्न रूपों की कथा का सैकड़ों श्रद्धालुओं को रसपान कराया। कथा का आयोजन दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से शाम 5 बजकर 15 मिनट तक हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के मधुर भजनों पर नृत्य कर अपनी हाजिरी लगाई और मनोकामनाएं मांगीं। कथा स्थल पर पूरे आयोजन के दौरान हर-हर महादेव के जयकारे गूंजते रहे।
संगीतमय शिवमहापुराण कथा का समापन शिवकान्त स्वामी जी द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन यज्ञ और पूजन कर कराया गया। इस दौरान सैकड़ों शिव भक्तों ने हवन में आहुतियां प्रदान कीं। समापन अवसर पर कथा वाचक जितेन्द्र जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में श्रद्धालुओं से सनातन धर्म के सिद्धांतों का पालन करते हुए भगवान भोलेनाथ की भक्ति, सदाचार और आपसी प्रेम को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
जितेन्द्र जी महाराज ने कहा कि धर्म, भक्ति और सद्भाव के मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। उनके आशीर्वचन के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश ग्रहण किया।
सेठ गुजरमल धर्मशाला में चल रही संगीतमय श्रीशिव महापुराण कथा के समापन और विदाई के समय श्रद्धालु भावुक हो गए। कई भक्तों की आंखें नम हो गईं। कथा के दौरान श्रद्धालुओं की भक्ति और उत्साह के बीच पूरा कथा स्थल हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजता रहा।
सेठ गुजरमल चैरिटेबल ट्रस्ट में शिवसेवा मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संगीतमय शिवमहापुराण कथा का समापन भंडारा और प्रसादी के साथ हुआ। इसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंगत प्रसादी ग्रहण की। इस पावन अवसर पर सभी भक्तों का सराहनीय और विशेष सहयोग रहा।