विद्या भारती राष्ट्रभक्त पीढ़ी के निर्माण में जुटी, शिक्षा के साथ संस्कार और चरित्र निर्माण पर जोर
पूर्व बैंक अधिकारी पुरुषोत्तम स्वरूप नामा ने चरित्र निर्माण और सनातन मूल्यों को विद्या भारती की पहचान बताया।
बारां जिले के देवरी स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित विचार संगोष्ठी के दौरान मंच पर उपस्थित अतिथि और प्रबुद्धजन।
बारां जिले के देवरी स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित विचार संगोष्ठी में सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी पुरुषोत्तम स्वरूप नामा ने कहा कि विद्या भारती भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों के प्रति सम्मान का भाव रखने वाली संस्कारयुक्त, चरित्रवान और राष्ट्रभक्त पीढ़ी के निर्माण का पुनीत कार्य कर रही है। उन्होंने शिक्षा के साथ संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिष्ठा की भावना जागृत करने को विद्या भारती की विशिष्ट पहचान बताया।
पुरुषोत्तम स्वरूप नामा ने कहा कि सभी लोग परम सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र कार्य से जुड़ने का अवसर मिला है। उन्होंने संस्था के विकास और विस्तार में सभी की सक्रिय भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पूर्ण समर्पण और सहयोग के साथ विद्या भारती के कार्य को सर्वव्यापी एवं सर्वस्पर्शी बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रामनरेश योगी और अध्यक्ष राजकुमार मेहता ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि विचार संगोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती और भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में विद्यालय के आचार्य-दीदियों, प्रबंध समिति के पदाधिकारियों, जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा तथा भैया-बहनों ने सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम के अंत में आभार व्यक्त किया गया। इसके बाद शांति मंत्र के साथ संगोष्ठी का विधिवत समापन हुआ। संगोष्ठी में शिक्षा के साथ संस्कार, चरित्र निर्माण और राष्ट्रनिष्ठा को बढ़ावा देने के साथ विद्या भारती के कार्यों के विस्तार में सामूहिक समर्पण और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया गया।