तस्वीर में समरानियां के स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित मातृ सम्मेलन के दौरान मंच पर अतिथि और नीचे बैठी माताएं नजर आ रही हैं।   

बारां/समरानियां। स्वामी विवेकानंद विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय, समरानियां में मातृ सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में बालकों के व्यक्तित्व निर्माण और संस्कारों में मातृशक्ति की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया।

विद्या भारती शिक्षा संस्थान के जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में मां को बालक की प्रथम गुरु माना गया है। मां ही संस्कारों एवं शिक्षा की पहली पाठशाला है। मां जन्म देती है और गुरु जीवन को दिशा देते हैं। बालक के व्यक्तित्व निर्माण में माता और गुरु दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उन्होंने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षित बालक तैयार करना नहीं, बल्कि संस्कारवान, चरित्रवान, आत्मनिर्भर और राष्ट्रभक्त नागरिकों का निर्माण करना है। इस उद्देश्य की पूर्ति में विद्यालय के साथ परिवार और विशेष रूप से मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाचार्या मीरा यादव रहीं। प्रीति मेहता विशिष्ट अतिथि तथा शिशु वाटिका प्रमुख गिरिराज वर्मा भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता एवं मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। विद्यालय की बालिकाओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।

मुख्य अतिथि मीरा यादव ने माताओं से कहा कि वे बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं और मोबाइल के अनावश्यक उपयोग से दूरी रखें। उन्होंने कहा कि मां का व्यवहार, संस्कार और आचरण बालक के व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करता है। इसलिए माताएं स्वयं आदर्श बनकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला रखें।

कार्यक्रम के संयोजक माणक वैष्णव तथा संचालक सोनू खंगार रहे। कार्यक्रम की जानकारी विद्यालय के प्रचार प्रमुख नीलू मेहता ने दी। सम्मेलन में शिक्षा के साथ संस्कार, चरित्र निर्माण और परिवार की भूमिका को प्रमुखता से रखा गया।

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