तस्वीर में साहित्यिक संस्था के कार्यक्रम के दौरान बैठक में उपस्थित गणमान्य अतिथि और साहित्यकार नजर आ रहे हैं।

साहित्यिक संस्था ‘कारवान-ए-अदब’ के तत्वावधान में 19 सितंबर को अदबी नशिस्त एवं साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शायरी के माध्यम से समसामयिक सरोकारों, राष्ट्रीय चेतना और इंसानी जज्बातों को स्वर दिया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध शायर डॉ. शकील कामिल हिण्डौनवी ने की। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार भैरु लाल भास्कर रहे, जबकि प्रो. अफजल अली एवं INTACH कन्वीनर जितेन्द्र शर्मा ‘पम्मी’ विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत संस्था अध्यक्ष हिसामुद्दीन रजा बारानवी एवं सेक्रेटरी शरफुद्दीन राही ने किया। कार्यक्रम का संचालन अशफाक सफदर बारानवी ने किया।

मुख्य अतिथि भैरु लाल भास्कर ने कहा कि साहित्य समसामयिक चुनौतियों और राष्ट्रीय चेतना को स्वर देकर समाज का मार्गदर्शन करता है। अध्यक्षता कर रहे डॉ. शकील कामिल ने अदब को समाज को जोड़ने और इंसानी जज्बातों को जीवंत रखने का सशक्त माध्यम बताया। प्रो. अफजल अली ने हिंदी-उर्दू के संगम को गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक बताया। वहीं, जितेन्द्र शर्मा ‘पम्मी’ ने ऐसे आयोजनों को सांस्कृतिक चेतना और विरासत संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

इसके बाद आयोजित काव्य गोष्ठी में डॉ. शकील कामिल हिण्डौनवी, भैरु लाल भास्कर, प्रो. अफजल अली, अशफाक सफदर, हिसामुद्दीन रजा, शरफुद्दीन राही, कदीर कमर, इमाम असलम बारानवी, वाहिद बारानवी, आसिफ आजाद एवं रईस फैजी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। उनकी रचनाओं को श्रोताओं से भरपूर दाद मिली।

कार्यक्रम के अंत में हिसामुद्दीन रजा बारानवी ने सभी अतिथियों, रचनाकारों एवं श्रोताओं का आभार व्यक्त किया। अदबी नशिस्त में साहित्य, सामाजिक सरोकार, राष्ट्रीय चेतना और मानवीय भावनाओं से जुड़े विचारों तथा रचनाओं की प्रस्तुति ने आयोजन के उद्देश्य को स्वर दिया।

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