तस्वीर में बाएं से दाएं कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के चुनाव चिह्न दिख रहे हैं।

बारां। आगामी 9 सितंबर को बारां नगर परिषद के 60 वार्डों में चुनाव होने हैं और मतदान की तारीख नजदीक आते ही सियासी हलचल गली-कूचों तक पहुंच गई है। पुलिस और जिला प्रशासन जहां शांतिपूर्ण मतदान तथा कानून व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है, वहीं कई वार्डों में कांटे के मुकाबले के चलते प्रत्याशियों के समर्थकों ने पल-पल की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए विशेष टीमों के दस्ते तैयार कर दिए हैं।

मुकाबला प्रत्येक वार्ड में नहीं, लेकिन करीब आधे वार्डों में रोचक और कांटे का दिखाई दे रहा है। समर्थकों की ये टीमें गली-कूचों और मोहल्लों में सक्रिय रहकर चुनावी गतिविधियों की जानकारी अपने प्रत्याशियों तक पहुंचा रही हैं। जैसे-जैसे चुनाव परवान चढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे मोहल्लों के 007 जेम्स बॉन्ड भी सक्रिय हो गए हैं। उनका काम “इधर की खबर उधर और उधर की खबर इधर” करना तय हो गया है।

नगर निकाय चुनाव को लेकर प्रत्याशियों के कार्यालयों पर समर्थकों का डेरा लगने लगा है। दूसरी ओर चाय-पान की गुमटियों पर भी हलचल बढ़ गई है। आम लोग चाय की चुस्कियों के साथ चुनावी चर्चा करते नजर आ रहे हैं। फिलहाल कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के सीधे मुकाबले को आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने त्रिकोणात्मक बना दिया है। कुछ जगह हवा का रुख निर्दलीय प्रत्याशियों के पक्ष में भी दिखाई दे रहा है, जबकि दोनों पार्टियों के प्रत्याशी दूसरे और तीसरे नंबर पर नजर आ रहे हैं।

हालांकि अभी यह कहना जल्दी होगा कि नगर परिषद बोर्ड की सत्ता की चाबी किसके हाथ में होगी, लेकिन दोनों राष्ट्रीयकृत पार्टियों को निर्दलीय प्रत्याशियों ने धरातल तो दिखा ही दिया है कि अब केवल वादों पर चुनाव नहीं जीता जा सकता। जीत काम के आधार पर ही सुनिश्चित होगी। यदि काम नहीं तो जीत भी नहीं। कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों ने समीकरण इस तरह बिगाड़ दिए हैं कि जहां भाजपा का वोट ज्यादा खिसक जाएगा, वहां कांग्रेस की जीत हो सकती है और जहां कांग्रेस का मतदाता निर्दलीयों से प्रभावित होगा, वहां भाजपा प्रत्याशी जीत सकता है। ऐसे में कई वार्डों में आश्चर्यचकित करने वाले परिणाम भी सामने आ सकते हैं।

फिलहाल प्रत्याशी जनता के बीच पहुंच रहे हैं और वादों का अंबार लगा रहे हैं। हालांकि जनता जानती सब कुछ है और वह लगभग यह भी तय कर चुकी है कि मत किसको देना है। इसी बीच जानकारी के अनुसार कई वार्डों की कच्ची बस्तियों में अब प्रमुख रूप से दारू और पैसों की डिमांड भी होने लगी है। इस बात की पुष्टि करने को कोई भी तैयार नहीं रहता, लेकिन होता यही है।

बारां नगर परिषद के कुछ वार्डों में प्रत्याशियों ने अपना राजनीतिक धर्म परिवर्तन भी कर लिया है। पहले भाजपा में रहे प्रत्याशी अब कांग्रेस में पहुंच गए हैं। भाजपा बोर्ड बनाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है, हालांकि टिकटों की बंदरबांट में उसकी वाट लग चुकी है। कांग्रेस के प्रत्याशियों में भी उचित स्थान से टिकट नहीं मिलने के कारण नाराजगी अवश्य है। इन दोनों के बीच तीसरे मोर्चे का आगमन राजनीति और कूटनीति की नई गणित को जन्म देता है।

टिकट वितरण से पूर्व भाजपा में पूर्व जिला अध्यक्ष आनंद गर्ग की पत्नी मंजू गर्ग को भी प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा से भाजपा प्रत्याशियों की मजबूती मानी जा रही थी, लेकिन उनके नामांकन नहीं भरे जाने से एक खेमा बिल्कुल शांत हो गया है, जबकि दूसरे खेमे का दम अब पता चल जाएगा। कई जगह वार्ड के सर्वे अनुसार जीते हुए प्रत्याशी को बदलकर कमजोर प्रत्याशी का चयन भी भाजपा को भारी पड़ सकता है।

इसी प्रकार कांग्रेस में भी कई वार्डों में उथल-पुथल किए गए हैं। कई बाहरी प्रत्याशियों को इधर-उधर किया गया है, जिसकी नाराजगी भी वार्डों में है। ऐसे में 9 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले बारां नगर परिषद के कई वार्डों में चुनावी समीकरण लगातार बदलते दिखाई दे रहे हैं और अंतिम परिणामों को लेकर राजनीतिक मुकाबला खासा दिलचस्प बना हुआ है।

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