तस्वीर में दवा विक्रेता समिति के सदस्य बारां कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए दिख रहे हैं।

प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति (PDVS) ने राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के अंतर्गत अधिकृत दवा विक्रेताओं की समस्याओं को लेकर सरकार के सामने गंभीर चिंताएं रखी हैं। समिति ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बारां, जो RGHS के नोडल अधिकारी भी हैं, के माध्यम से परियोजना अधिकारी, RGHS जयपुर को ज्ञापन भेजकर नियमों में स्पष्टता लाने और केमिस्टों के बकाया भुगतान तत्काल जारी करने की मांग की है।

प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति बारां के जिला प्रभारी कृष्ण शर्मा ने बताया कि RGHS और दवा विक्रेताओं के बीच हुए मूल समझौते (MOU) के अनुसार डॉक्टरों द्वारा पर्चे पर लिखी गई ब्रांडेड दवा के स्थान पर किसी दूसरी कंपनी की दवा देना यानी ब्रांड सब्स्टीट्यूशन पूरी तरह प्रतिबंधित है। दूसरी ओर, विभाग की हालिया गाइडलाइंस और लाभार्थियों की मांग के कारण केमिस्टों के सामने असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

समिति ने विभाग से स्पष्ट रूप से पूछा है कि क्या फार्मेसी को नियमों में ढील देकर दवा बदलने की अनुमति है या नहीं। समिति ने इस संबंध में तत्काल लिखित निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि दवा विक्रेताओं को नियमों की अस्पष्टता के कारण बाद में परेशानी का सामना न करना पड़े।

इसके साथ ही समिति ने बीमा दावों की जांच करने वाली एजेंसी (TPA) की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि TPA द्वारा केमिस्टों के जायज बिलों में भी मनमानी और गलत कटौतियां (Deductions) यह कहते हुए की जा रही हैं कि उनके द्वारा दी गई दर बाजार की औसत दर से अधिक है।

समिति का कहना है कि RGHS के दवा विक्रेता दवाओं की MRP के अनुसार बिलिंग करते हैं। विभाग द्वारा खरीद बिल मांगे जाने पर उन्हें प्रस्तुत करने के बावजूद कटौती किया जाना भी समिति ने मनमानी बताया है। समिति ने मांग की है कि पूर्व में की गई सभी गलत कटौतियों की तत्काल समीक्षा की जाए और दवा विक्रेताओं की रोकी गई पात्र राशि वापस जारी की जाए।

दवा विक्रेताओं की सबसे बड़ी चिंता भुगतान में हो रही अत्यधिक देरी को लेकर है। वर्तमान में केमिस्टों को लगभग 8 से 9 महीने के विलंब से भुगतान मिल रहा है। समिति के अनुसार, इतनी लंबी देरी के कारण दवा विक्रेताओं के लिए व्यापार चलाना और दवाओं का स्टॉक बनाए रखना बेहद मुश्किल हो गया है।

समिति ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि केमिस्टों को अस्पष्ट नियमों के भरोसे काम करने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता, ताकि बाद में उन्हीं नियमों के आधार पर उनके भुगतान में कटौती की जाए। प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति ने सरकार और RGHS प्रबंधन से इस संवेदनशील विषय पर शीघ्र निर्णय लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाने का अनुरोध किया है, जिससे आम जनता और केमिस्ट दोनों को राहत मिल सके।

इस अवसर पर प्रादेशिक दवा विक्रेता समिति के जिला अध्यक्ष कृष्ण शर्मा, जिला रीटेल समिति के संरक्षक प्रेम खंडेलवाल, सौरभ भार्गव, हेमंत गुप्ता, राजेंद्र गौत्तम, आयुष दवा विक्रेता उत्तम गुप्ता और योगेश गुप्ता उपस्थित रहे।

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