बारां में नेत्रदान: अग्रवाल परिवार की पहल से मिला 2 लोगों को जीवन
भारत विकास परिषद के अभियान के बीच एक माह में 5वां नेत्रदान संपन्न। कोटा से पहुंची टीम ने प्रतिकूल मौसम के बावजूद प्रक्रिया पूरी की।
तस्वीर में नीले चेक शर्ट और फूलमाला पहने व्यक्ति स्वर्गीय देवकीनंदन अग्रवाल दिख रहे हैं।
बारां में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। भारत विकास परिषद शाखा बारां के लगातार चलाए जा रहे जन-जागरूकता अभियान के बीच विगत एक माह में पांच नेत्रदान सफलतापूर्वक संपन्न कराए जा चुके हैं। वहीं 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चल रहे नेत्रदान पखवाड़े के अंतर्गत शुक्रवार को दूसरा नेत्रदान संपन्न हुआ।
स्वर्गीय श्री देवकीनंदन जी अग्रवाल (पंप वाले) के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने नेत्रदान का निर्णय लेकर मानव सेवा की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की। भारत विकास परिषद के सदस्य रवि अग्रवाल को प्रातः करीब 5:30 बजे नेत्रदान की संभावना की जानकारी मिली। उन्होंने शोक-संतप्त परिवार को इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया और तत्काल नेत्र मित्र हितेश खंडेलवाल को सूचना दी।
इसके बाद शाइन इंडिया फाउंडेशन, कोटा की टीम से संपर्क कर उन्हें बारां बुलाया गया। भारी बारिश एवं प्रतिकूल मौसम के बावजूद फाउंडेशन के डॉ. कुलवंत गौड़ कोटा से बारां पहुंचे। परिवार की सहमति से नेत्रदान की प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न कराई गई।
भारत विकास परिषद द्वारा लगातार विभिन्न माध्यमों से आमजन को नेत्रदान के महत्व के प्रति जागरूक किया जा रहा है। परिषद का कहना है कि कम समय में लगातार संपन्न हो रहे नेत्रदान समाज में बढ़ती जागरूकता और नेत्रदान के प्रति सकारात्मक सोच का परिणाम हैं।
परिषद अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल ने स्वर्गीय देवकीनंदन अग्रवाल को ‘अमर नेत्रदानी’ के रूप में शत-शत नमन करते हुए कहा कि उनका यह पुण्य कार्य समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। नेत्रदान के माध्यम से उनकी आंखें किसी जरूरतमंद के जीवन में नई रोशनी का माध्यम बनेंगी।
परिषद ने नेत्रदान का निर्णय लेने वाले अग्रवाल परिवार, परिवार को प्रेरित करने वाले रवि अग्रवाल, नेत्र मित्र हितेश खंडेलवाल तथा भारी बारिश में कोटा से बारां पहुंचकर सेवा देने वाले डॉ. कुलवंत गौड़ एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यह संदेश भी सामने आया कि “नेत्रदान महादान है—जीवन के बाद भी किसी की दुनिया रोशन करने से बड़ी श्रद्धांजलि कोई नहीं।”