बारां नगर परिषद चुनाव में तीसरे मोर्चे की सक्रियता और बागियों के पाला बदलने से भाजपा और कांग्रेस के चुनावी समीकरण प्रभावित हो रहे हैं।

बारां। बारां नगर परिषद चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस में प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है और कई वार्डों में नाम भी तय किए जा चुके हैं, लेकिन दोनों दलों के भीतर टिकट को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के कारण कुछ वार्डों में प्रत्याशियों की घोषणा अब तक नहीं हो सकी है। इस बीच तीसरे मोर्चे ने भी सभी 60 वार्डों में प्रत्याशी उतारने का लक्ष्य तय कर दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के चुनावी समीकरण को चुनौती देने की तैयारी कर ली है।

चुनाव की तैयारियों के बीच कुछ वार्डों में ऐसी स्थिति भी सामने आई है, जहां पार्टियों को प्रत्याशी तलाशने में मशक्कत करनी पड़ी। आनन-फानन में प्रत्याशी ढूंढकर टिकट दिए गए हैं। ऐसे प्रत्याशियों की जीत की गारंटी कितनी होगी, इसका पैमाना चुनाव परिणाम ही तय करेगा। वहीं कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी भी मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।

तीसरे मोर्चे की सक्रियता से भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले का गणित प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। तीसरे मोर्चे ने पूरे 60 वार्डों से प्रत्याशी खड़े करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। ऐसे में कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच पड़ने वाले मतों में तीसरे मोर्चे का प्रत्याशी कितनी सेंध लगाता है, उसी के अनुरूप हार-जीत का फैसला होने की स्थिति बन सकती है।

भाजपा और कांग्रेस दोनों सोमवार तक अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने का प्रयास कर रही हैं। कुछ वार्डों में अंतर्द्वंद के कारण प्रत्याशी तय करने में पार्टी आलाकमानों को नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। इसका एक नमूना तब सामने आया, जब भाजपा के एड. राकेश नामा तथा राकेश नंदवाना ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। गौरतलब है कि भाजपा में प्रत्याशियों के चयन का पैमाना तय करने के लिए बाहर से बुलाए गए नेता और पदाधिकारियों को यहां बैठाया गया है। इसे लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी प्रबल रूप से सामने आ रही है।

हालांकि भाजपा विधायक राधेश्याम बेरवा, जिलाध्यक्ष नरेश सिंह सिकरवार और पूर्व जिलाध्यक्ष आनंद गर्ग पार्टी में हुए डैमेज कंट्रोल की पूरी कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस में भी कई वार्डों में आपसी प्रतिस्पर्धा की स्थिति रही है, लेकिन वहां पार्टी हाईकमान केवल पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया होने के कारण स्थिति को नियंत्रण में रखने का प्रयास किया जा रहा है।

उधर, तीसरे मोर्चे की कमान पूर्व सभापति कमल राठौर के हाथ में है। वह अपने ढाई साल के कार्यकाल में हुए शहर के विकास को आधार बनाकर मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। अब फैसला आम जनता को करना है कि शहर में विकास को किस आधार पर देखकर वह अपना मतदान करेगी।

कुल मिलाकर नगर परिषद चुनाव की तस्वीर प्रत्याशियों के नामांकन पर्चे दाखिल होने के बाद ही पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल भाजपा, कांग्रेस, तीसरे मोर्चे और निर्दलीय प्रत्याशियों की ओर से अपने-अपने दावे किए जा रहे हैं और चुनावी मुकाबले का वास्तविक असर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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