बारां नगर परिषद चुनाव: 60 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला, नतीजे तय करेंगे भावी राजनीति
मतदान के बाद बारां में चुनावी गणित तेज, कांग्रेस और भाजपा के साथ आप की दावेदारी से त्रिशंकु बोर्ड और किंगमेकर की संभावनाएं उभरीं।
तस्वीर में बारां नगर परिषद भवन के सामने मतपेटी और राजनीतिक दलों के झंडे दिख रहे हैं।
बारां नगर परिषद चुनाव के मतदान के बाद शहर में राजनीतिक चर्चाओं और चुनावी गणित का दौर तेज हो गया है। 60 वार्डों में कांग्रेस और भाजपा के अलावा आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों के मैदान में होने से मुकाबला त्रिकोणीय रहा है। अब हर चौपाल, चाय-पान की दुकान और गुमटी पर अपने-अपने समीकरण लगाए जा रहे हैं। कोई कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने की बात कर रहा है तो कोई त्रिशंकु बोर्ड बनने की संभावना जता रहा है।
सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने प्रत्याशियों की बाड़ाबंदी कर उन्हें कहीं अन्यत्र भेज दिया है। इसी बीच भाजपा की एक प्रत्याशी मतदान संपन्न होने के कुछ देर बाद ही कहीं गायब हो गई। इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि उसके परिजनों ने इस संबंध में पुलिस को भी सूचित किया है।
बारां नगर परिषद के संपन्न हुए चुनाव परिणाम सभी राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, क्योंकि ये आगामी जिला परिषद और पंचायती चुनावों के लिए भी भविष्य की राजनीति तय करेंगे। कांग्रेस और भाजपा के साथ तीसरे मोर्चे के रूप में आम आदमी पार्टी भी अपनी आगे की रणनीति में जुटी हुई है।
कांग्रेस से प्रमोद जैन भाया की प्रतिष्ठा इस चुनाव से इसलिए भी जुड़ी हुई है कि लगभग 15 साल से उन्हीं के नेतृत्व में बारां नगर परिषद में बोर्ड का गठन होता आया है। वहीं भाजपा इस बार एंटी इनकंबेंसी के दम पर अपना बोर्ड बैठाने का दावा कर रही है। कमल राठौर के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने भी प्रत्येक वार्ड में अपनी उपस्थिति पूरी दमखम से दर्ज कराई है।
त्रिकोणीय संघर्ष के चलते कई वार्डों में आश्चर्यजनक परिणाम आने की चर्चा है। कई वार्डों में उलटफेर की संभावना भी जताई जा रही है, जिनकी कल्पना लोग अभी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव परिणाम आने के बाद राजनीतिक समीकरण बदलने की स्थिति बन सकती है।
कांग्रेस के सामने सभापति की सीट को लेकर भी कशमकश की स्थिति रहने की चर्चा है। पार्टी में विशेष तौर पर चार दावेदार प्रमुख बताए जा रहे हैं। भाजपा के सामने भी यही चुनौती रहेगी। यदि भाजपा की पर्याप्त सीटें आती हैं तो बोर्ड गठन और सभापति पद को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी, अन्यथा उसे कोई और विकल्प तलाशना पड़ सकता है।
इन चुनावों में पूर्ण रूप से संतुष्ट नजर आ रहे आम आदमी पार्टी के कमल राठौर ने भी बोर्ड बनाने का दावा ठोका है। हालांकि लोगों की चर्चा के अनुसार सामने आ रहे रुझानों के अनुरूप अधिकांश लोग कांग्रेस के बोर्ड बनने की बात कर रहे हैं। भाजपा फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में है, जबकि तीसरा मोर्चा किंग मेकर की भूमिका में भी रह सकता है।
भाजपा जिलाध्यक्ष नरेश सिंह सिकरवार और विधायक राधेश्याम बेरवा सहित प्रमुख पदाधिकारी इन चुनावों में भाजपा का बोर्ड बैठने की बात कर रहे हैं। उनका कहना है कि गत कांग्रेस के बोर्ड में किसी भी प्रकार के विकास कार्य नहीं हुए हैं।
वहीं कांग्रेस के नेतृत्वकर्ता प्रमोद जैन भाया का कहना है कि सरकार तो भाजपा की है। यदि कार्य करवाने ही थे तो इसमें भाजपा क्यों पीछे रही। उन्होंने कहा कि इनकी कथनी और करनी में अंतर है।
तीसरे मोर्चे यानी आम आदमी पार्टी का नेतृत्व कर रहे पूर्व सभापति कमल राठौर का कहना है कि उनके ढाई साल के कार्यकाल में शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों के सौंदर्यकरण, पुलियाओं, नाली और नालियों के निर्माण तथा आमजन की समस्याओं का निराकरण सहित कई विकास कार्य हुए हैं, जिसकी जनता गवाह है।
अब निगाहें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं। मतदान के बाद सामने आ रहे अलग-अलग राजनीतिक दावों और चर्चाओं के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जनता के मतदान की बयार किस ओर बहती है और 60 वार्डों का जनादेश बारां नगर परिषद में किस राजनीतिक दल के बोर्ड की तस्वीर सामने लाता है।