बारां नगर परिषद चुनाव में तेज हुई सियासी जुगत, घर-घर दस्तक और एक-एक वोट की गणित पर नजर
बारां नगर परिषद के 60 वार्डों में चुनावी जुगत तेज, भाजपा-कांग्रेस-आप और निर्दलीय प्रत्याशी एक-एक वोट की गणित में जुटे हैं।
बारां नगर परिषद के 60 वार्डों में प्रत्याशियों के चयन को लेकर जनता ने अब तक अपनी जुबान नहीं खोली है, जबकि बुधवार को होने वाले चुनाव के लिए मतदाताओं ने अपना मन बना लिया है। जनता के सामने उचित प्रत्याशी का चयन करना भी बुद्धिमता का परिचय देना होगा।
चुनाव प्रचार का शोर थमने के बाद प्रत्याशी घर-घर की कुंडी खटखटाकर और घंटी बजाकर अपने पक्ष में मतदाताओं से मनुहार करने में जुटे रहे। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने मंच सजाकर एक-दूसरे पर खूब आरोपों की बौछार की, वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने अपने नेताओं के साथ वार्डवार संपर्क पर जोर दिया। कई जगह निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपने बलबूते पर मतदाताओं से संपर्क किया।
बुधवार को होने वाले नगर निकाय चुनाव के लिए कांग्रेस, भाजपा, आम आदमी पार्टी और निर्दलीय प्रत्याशी अपने-अपने दावे करते हुए जनता के समक्ष अपनी योजनाएं प्रस्तुत कर चुके हैं। मंगलवार से बुधवार प्रातः तक जुगत और आंकड़ों की गणित चलेगी। रात्रिकालीन समय में मतदाताओं को इधर से उधर करने का खेल भी व्यवस्थाओं के अनुरूप चलता रहा। एक-एक वोट पर टिक मार्क करके सूचियां अपने समर्थकों को सुपुर्द की जा चुकी हैं। शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के लिए समर्थकों की टोलियों को भी प्रत्याशियों ने निर्देशित किया है।
नगर परिषद चुनाव में चेयरमैन पद को लेकर तीनों दलों ने अपने-अपने दावे किए हैं और बोर्ड बनने की संभावनाओं पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। बारां नगर परिषद का चुनाव वास्तविकता में कांग्रेस के लिए बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। कांग्रेस चाहती है कि इस बार भी पुनः उसका बोर्ड काबिज हो। इसी उद्देश्य से उसके प्रत्याशी प्रमोद जैन भाया, उर्मिला जैन भाया और पूर्व विधायक पानाचंद मेघवाल के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं भाजपा भी पूरे दमखम के साथ चुनाव मैदान में उतरी हुई है। उसके नेता चाहते हैं कि इस बार उनका चेयरमैन नगर परिषद में बैठे। इसी मंशा को लेकर विधायक राधेश्याम बेरवा, जिला अध्यक्ष नरेश सिंह सिकरवार सहित अन्य नेता वार्ड-वार्ड जाकर मेहनत करते नजर आ रहे हैं।
उधर तीसरा मोर्चा यानी आम आदमी पार्टी भी प्रचार-प्रसार में भाजपा और कांग्रेस से पीछे नहीं है। वह भी चाहती है कि किसी भी तरह नगर परिषद के बोर्ड पर उसका कब्जा हो। लेकिन सवाल यह है कि जनता किसे देखना पसंद कर रही है और किस नेता की गणित इन चुनावों में सफल रणनीति साबित होगी, यह लगभग मतदान के बाद ही पता चल पाएगा।
लोगों की राय की बात करें तो अभी भी मतदाता अपना रुझान स्पष्ट नहीं कर रहा है। कोई कांग्रेस का बोर्ड बनना तय बता रहा है, तो कोई मिला-जुला परिणाम आने की बात कह रहा है। कई लोग यह भी कह रहे हैं कि इस बार भाजपा का वोट बन जाएगा।
अब मिले-जुले समीकरणों की बात करें तो कांग्रेस पार्टी कभी भी पूर्व सभापति कमल राठौर के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी को स्वीकार नहीं करेगी। उधर कई जानकारों का यह भी कहना है कि भाजपा और कमल राठौर की जुगलबंदी बन सकती है, लेकिन इसके लिए प्रादेशिक स्तर के नेताओं को सम्मिलित होना पड़ेगा। हालांकि ऐसा तब होगा, जब भाजपा और आम आदमी पार्टी को अस्पष्ट बहुमत मिलेगा।
अब निगाहें मतदान के बाद आने वाले परिणाम पर रहेंगी। परिणाम के बाद प्रत्याशियों के बीच कैपचरिंग का खेल भी चलेगा। कोई भी प्रत्याशी अपने आप को किसी से कम नहीं आंक रहा है। ऐसे में बारां नगर परिषद के 60 वार्डों का चुनाव परिणाम राजनीतिक दावों, आंकड़ों की गणित और जमीनी संपर्क की वास्तविकता को सामने लाएगा।