बारां में हिंदी दिवस पर काव्य गोष्ठी, स्वातंत्र्योत्तर कविता पर चर्चा
राजकीय संग्रहालय और युवा मंडल संस्थान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों ने राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सरोकारों पर विचार व्यक्त किए।
तस्वीर में राजकीय संग्रहालय बारां में आयोजित कार्यक्रम में अतिथि और छात्राएं उपस्थित हैं।
बारां। हिंदी दिवस के अवसर पर राजकीय संग्रहालय बारां में “स्वातंत्र्योत्तर काव्य में राष्ट्रीय भावना” विषय पर विचार एवं काव्य गोष्ठी आयोजित की गई। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, राजस्थान के राजकीय संग्रहालय बारां तथा युवा मंडल संस्थान बारां के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुआ। कवि सूरजमल मियाडा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत करते हुए संग्रहालय के सहायक प्रशासनिक अधिकारी संदीप सिंह जादौन ने कहा कि, “हिंदी दिवस का आयोजन एवं चर्चा एक सार्थक कार्य है, ऐसे कार्य समाज में प्रेरणा का विषय बनते हैं।”
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अंतरराष्ट्रीय हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र यादवेंद्र ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हिंदी कविता ने राष्ट्र के बदलते स्वरूप, सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रीय एकता और आम आदमी की आकांक्षाओं को प्रभावी स्वर दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय भावना केवल देशभक्ति के उद्घोष तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन में भी अभिव्यक्त होती है।
मुख्य वक्ता अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रद्युम्न वर्मा ने कहा कि स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कविता में राष्ट्रीय चेतना अनेक रूपों में दिखाई देती है। कवियों ने लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक एकता, सीमा की रक्षा, ग्राम्य जीवन तथा राष्ट्र निर्माण जैसे विषयों को अपनी रचनाओं का आधार बनाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बारां के कोषाध्यक्ष हेमराज बंसल ने की। उन्होंने कहा कि हिंदी हमारी भावनाओं, संवेदनाओं और सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाली भाषा है।
विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय कवि संगम, बारां के जिलाध्यक्ष नाथूलाल निर्भय ने कहा कि कविता में राष्ट्रप्रेम की सार्थकता हिंदी का मूल है। विशिष्ट अतिथि व्यंग्यकार श्री मेवाराम चौधरी ने कहा कि व्यंग्य समाज की विसंगतियों को सामने लाकर लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करता है। विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय साहित्य परिषद, बारां के अध्यक्ष बच्छराज राजस्थानी ने साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के संयोजक भैरूलाल भास्कर ने कहा कि हिंदी दिवस जैसे आयोजन वर्षभर साहित्य और हिंदी के प्रति सकारात्मक वातावरण निर्माण का माध्यम बनें।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों एवं कवियों ने “स्वातंत्र्योत्तर काव्य में राष्ट्रीय भावना” विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान देशभक्ति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार और राष्ट्रीय एकता से ओतप्रोत काव्य रचनाओं का पाठ भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में युवा मंडल संस्थान बारां के प्रांतीय सचिव जितेन्द्र शर्मा पम्मी ने अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों एवं उपस्थित साहित्यप्रेमियों का आभार व्यक्त किया।