तस्वीर में बारां के जैन मंदिर परिसर में पर्यूषण पर्व पर पूजा करते श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं।

बारां। पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन कल्पसूत्र वाचन के दौरान भगवान महावीर के समय घटित दस आश्चर्यों का गहराई से वर्णन किया गया। इसके बाद माता त्रिशला द्वारा देखे गए 14 महास्वप्नों का वर्णन किया गया। इस अवसर पर स्वाध्याय बंधुओं ने प्रत्येक स्वप्न के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

जैन श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र रंगावत, अन्ता विधायक प्रमोद जैन भाया एवं अशोक बोरड़िया ने बताया कि पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की आराधना करवाने के लिए अखिल भारतीय श्री वर्धमान जैन नवयुवक मण्डल, जावरा से भावेश जी हरण, ओजस सुराणा एवं रक्षित कोचर साधर्मिक बंधु पहुंचे। उन्होंने पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन को अमूल्य बताते हुए धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पर्व की आराधना करवाई।

स्वाध्याय बंधुओं ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को किस समय कैसा भोजन करना चाहिए और किस वक्त कैसा व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार माता त्रिशला इन सभी बातों का ध्यान रखती थीं, उसी प्रकार सभी गर्भवती महिलाओं को भी इनका पालन अवश्य करना चाहिए।

राहुल मारू, कपिल रंगावत एवं पीयूष श्रीमाल ने बताया कि मंदिर पर भगवान के 14 स्वप्न तथा आरती, पंच प्रकार पूजा, माला और तिलक की बोलियां भी सकल श्रीसंघ की तरफ से ली गईं। भगवान के मुनीम जी की बोली प्रमोद जैन भाया, यश जैन भाया पारख परिवार के नाम रही। लक्ष्मी जी तथा पन्ना जी की बोली अशोक कुमार बोरडिया, गौत्तम कुमार बोरडिया एवं प्रवीण कुमार बोरडिया परिवार के नाम रही। बाकी श्रीसंघ ने मिलकर 14 स्वप्नों की बोलियां लीं।

चन्द्रप्रभू महिला मण्डल की मेघा मारू, रेखा बोरडिया एवं अरूणा शाह ने बताया कि शनिवार की स्नात्र पूजा बुद्विप्रकाश मारू, सचिन मारू-मीनाक्षी मारू परिवारजन एवं भोजन व्यवस्था अन्ता विधायक एवं पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया, उर्मिला भाया तथा यश पारख परिवार की तरफ से सम्पन्न हुई।

श्री चन्द्रप्रभू मंदिर से भगवान को पलनाजी में विराजगार कर घण्टाघर होते हुए वापस मंदिर पर पहुंचाया गया। पर्यूषण पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में नवयुवक मण्डल, महिला मण्डल सहित सकल श्रीसंघ उपस्थित रहा। दिनभर के पूजा कार्यक्रमों में राजेश पुजारी का विशेष सहयोग रहा। इस प्रकार पर्यूषण पर्व के पांचवें दिन धार्मिक आराधना, कल्पसूत्र वाचन, माता त्रिशला के 14 महास्वप्नों के वर्णन और विभिन्न बोलियों के आयोजन के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।

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