तस्वीर में लोग मंदिर के भीतर पारंपरिक अनुष्ठान और पूजा करते हुए नजर आ रहे हैं।

बारां में पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के सातवें दिन आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में कर्मों के महत्व और उनसे मुक्ति के मार्ग पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। अखिल भारतीय श्री वर्धमान जैन नवयुवक मण्डल, जावरा से आए भावेश जी हरण, ओजस जी सुराणा एवं रक्षित जी कोचर ने अपने व्याख्यान में महावीर स्वामी, भगवान पार्श्वनाथ, नेमीनाथ एवं आदिनाथ के जीवन प्रसंगों के माध्यम से धर्म और कर्म के महत्व को समझाया।

श्री जैन श्वेताम्बर नवयुवक मण्डल के अशोक बोरड़िया, ऋषभ श्रीमाल, दीपक रंगावत एवं नरेष शाह ने बताया कि पर्यूषण पर्व की आराधना के लिए जावरा से आए साधर्मिक बंधुओं ने सातवें दिन प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी निर्वाण को प्राप्त हुए और मोक्ष में गए। उनका मोक्ष कल्याणक हुआ। प्रभु महावीर हमसे सात राजलोक ऊपर जाकर विराजमान हो गए। हमें भी उसी ऊंचाई तक जाना है।

व्याख्यान में समझाया गया कि मोक्ष की ऊंचाई तक पहुंचने के लिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। ऐसा विचार भी नहीं करना चाहिए कि इतनी ऊंचाई से गिरने पर हड्डियां टूट जाएंगी। नीचे नरक की असहनीय पीड़ा है, जबकि ऊपर मोक्ष की सुंदर मंदरियां हैं। प्रवचन के माध्यम से कर्मों के महत्व और कर्मों को भोगे बिना उनसे छुटकारा नहीं मिलने की बात बताई गई।

चन्द्रप्रभू महिला मण्डल अध्यक्ष उर्मिला जैन भाया, सोनम बोरडिया, प्रीति रंगावत एवं चेतना श्रीमाल ने बताया कि पर्यूषण पर्व के अवसर पर गौत्तम बोरडिया की पत्नि रेखा बोरडिया के पांच तथा राहुल मारू की पत्नि खुषबू मारू के सातवें दिन के उपवास की तपस्या चल रही है। इस दौरान उनकी सुखसाता पूछी गई।

सोमवार को स्नात्र पूजा दिनेष-मोना, विरेन्द्र-पूजा परिवार की तरफ से रही, जबकि भोजन बुद्विप्रकाष मारू, सचिन-मीनाक्षी मारू सपरिवार की तरफ से रहा। पर्यूषण पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में नवयुवक मण्डल, महिला मण्डल सहित सकल श्रीसंघ उपस्थित रहा।

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