हापुड़: उत्तराखंड के ज्वेलर्स परिवार पर दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज
पीड़िता ने पति पर गंभीर आरोप लगाते हुए एसपी से शिकायत की थी, जिसके बाद नगर कोतवाली पुलिस ने छह लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
हापुड़ नगर कोतवाली पुलिस ने दहेज उत्पीड़न के मामले में छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
हापुड़ में दहेज उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें उत्तराखंड के एक बड़े और रसूखदार ज्वेलर्स परिवार की बहू ने अपने पति समेत ससुराल पक्ष के छह लोगों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने, शारीरिक और मानसिक क्रूरता बरतने तथा जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। विवाहिता की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक के आदेश से नगर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार, पीड़िता के परिवार ने शादी में करीब 70 लाख रुपये खर्च किए थे। इसके बावजूद ससुराल पक्ष की ओर से कथित तौर पर लगातार नकदी और लग्जरी कार की मांग की जाती रही। विवाहिता का आरोप है कि महंगे मोबाइल फोन, खासकर आईफोन 17 प्रो मैक्स को लेकर भी घर में विवाद हुआ। इन मांगों का विरोध करने पर उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई।
विवाहिता ने पति पर वैवाहिक संबंधों के दौरान उसकी इच्छा के विरुद्ध अप्राकृतिक यौन कृत्य के लिए दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, विरोध करने पर पति ने उसके साथ बुरी तरह मारपीट की। पीड़िता का दावा है कि बेटी के जन्म के बाद ससुराल पक्ष का उत्पीड़न और बढ़ गया तथा उसके साथ लात-घूंसों से मारपीट की गई। उसने यह भी आरोप लगाया है कि उसे गोली मारने की धमकी दी गई।
शिकायत में पीड़िता ने अपने पिता की तबीयत बिगड़ने का भी जिक्र किया है। उसके अनुसार, प्रताड़ना और परेशानी के बारे में सुनकर उसके पिता को गहरा सदमा लगा, जिसके कारण उन्हें हार्ट अटैक आ गया। हालांकि, इस दावे की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय तथ्यों और रिपोर्ट की जांच होना बाकी है।
न्याय की मांग को लेकर विवाहिता ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) से शिकायत की थी। एसपी के आदेश पर नगर कोतवाली पुलिस ने पति समेत ससुराल पक्ष के छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।
पुलिस प्रशासन के अनुसार, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मुकदमा दर्ज होने का अर्थ आरोपों का न्यायिक रूप से सिद्ध होना नहीं है। मामले में वास्तविक घटनाक्रम और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी पुलिस जांच तथा उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।