हापुड़: आपदा प्रबंधन के लिए SHG की महिलाओं को मिला प्रशिक्षण
जिलाधिकारी कविता मीना के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 100 महिलाओं को भूकंप, बाढ़ और आग से बचाव के गुर सिखाए गए।
हापुड़ के एसएसवी डिग्री कॉलेज में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया।
हापुड़ में आपदा के दौरान जन-धन की हानि कम करने और सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को जागरूक एवं प्रशिक्षित किया गया। जिलाधिकारी कविता मीना के मार्गदर्शन में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, हापुड़ की ओर से एस.एस.वी. डिग्री कॉलेज में विशेष महिला जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें लगभग 100 महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और आपदा प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
जिला आपदा विशेषज्ञ द्वारा आयोजित एवं संचालित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को आपदा प्रबंधन, सुरक्षा उपायों और आपदा जोखिम न्यूनीकरण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में विभिन्न आपदा विशेषज्ञों ने आपातकालीन परिस्थितियों में महिलाओं की भूमिका, प्राथमिक सहायता और राहत कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में महिलाओं को आपदा से पहले तैयारी करने के महत्व के बारे में बताया गया। वक्ताओं ने समझाया कि महिलाएं अपने परिवार और समुदाय को जागरूक करके आपदाओं के दौरान जन-धन की हानि को काफी हद तक कम करने में योगदान दे सकती हैं।
भूकंप से बचाव के उपाय बताते हुए घनेन्द्र पाल ने सुरक्षित रहने के लिए “झुको, ढको और पकड़कर रहो” का मंत्र दिया। उन्होंने घरों में भारी वस्तुओं को सुरक्षित रखने और आपातकालीन निकासी योजना तैयार करने पर जोर दिया।
बाढ़ और अतिवृष्टि से बचाव के संबंध में मयंक ने जलभराव वाले क्षेत्रों में जाने से बचने, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने तथा प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी। उन्होंने राहत शिविरों में स्वच्छता बनाए रखने और पेयजल प्रबंधन में सहयोग करने की भी अपील की।
अग्निकांड और घरेलू आग से सुरक्षा के बारे में अमन ने रसोई गैस सिलेंडर तथा बिजली के उपकरणों का सुरक्षित उपयोग करने के तरीके समझाए। उन्होंने आग लगने की स्थिति में तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने और अग्निशमन सेवा से संपर्क करने के संबंध में भी जानकारी दी।
वहीं, आंधी-तूफान और वज्रपात से बचाव के उपाय बताते हुए श्री फैसल ने खराब मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों, बिजली के खंभों और जर्जर मकानों से दूर रहने तथा पक्के भवनों में शरण लेने की सलाह दी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने आपदा प्रबंधन में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सक्रिय भागीदारी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ये महिलाएं सामाजिक जागरूकता की मजबूत कड़ी हैं। वे परिवारों को आपदा के लिए तैयार करने, प्राथमिक उपचार देने और सुरक्षित निकासी में सहायता कर सकती हैं। बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जिलाधिकारी हापुड़ कविता मीना के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आपदा प्रबंधन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने सभी विषयों में गहरी रुचि दिखाई और प्राप्त जानकारी को अपने परिवारों, समूहों तथा आसपास के समुदायों तक पहुंचाने का संकल्प लिया, ताकि सुरक्षित समाज के निर्माण में वे अपनी प्रभावी भूमिका निभा सकें।