राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष್ಯ में सनवाड़ में आयोजित पथ संचलन का स्वागत द्वार।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में शुक्रवार को सनवाड़ शाखा की ओर से पथ संचलन का आयोजन किया गया। रावला चौक से शाम 5 बजे शुरू हुए इस संचलन में करीब 100 स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में अनुशासन और उत्साह के साथ भाग लिया। गांव के प्रमुख मार्गों से निकले स्वयंसेवकों का ग्रामीणों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया।

घोषवादन की मधुर और प्रेरणादायी धुनों के बीच स्वयंसेवक अनुशासित पंक्तियों में आगे बढ़े। पथ संचलन के दौरान विभिन्न स्थानों पर ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का आत्मीय स्वागत किया। पूरे मार्ग में अनुशासन, उत्साह और सामाजिक सहभागिता का माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विजेंद्र सिंह ने संघ के शताब्दी वर्ष के महत्व पर प्रकाश डालते हुए स्वयंसेवकों और उपस्थित नागरिकों को संबोधित किया। उन्होंने संघ की ओर से समाज परिवर्तन के लिए बताए गए पंच परिवर्तन के विषयों पर विस्तार से विचार रखे।

विजेंद्र सिंह ने सामाजिक समरसता को मजबूत बनाने, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्वदेशी भाव को प्रोत्साहित करने और नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में सकारात्मक बदलाव लाकर राष्ट्र और समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

पथ संचलन के माध्यम से स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठन, सेवा और राष्ट्रभावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में राष्ट्रभावना, सामाजिक एकता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता को सुदृढ़ करना रहा।

पथ संचलन के सफल आयोजन में सनवाड़ शाखा के स्वयंसेवकों का सक्रिय सहयोग रहा। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों से जुड़े पंच परिवर्तन के संदेश को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।

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