तस्वीर में जवास जैन मंदिर परिसर में रखी खंडित जैन प्रतिमाओं के पास ट्रस्टी खड़े हैं।

ऋषभदेव में महावीर नगर स्थित श्री 1008 महावीर दिगम्बर जैन मंदिर और पीपली स्थित श्री 1008 शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर से प्राप्त खंडित जैन प्रतिमाओं को आदिनाथ ट्रस्ट मंडल जवास के सदस्यों ने जवास स्थित श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पहुंचाया। इन प्रतिमाओं को मंदिर परिसर में बनाए गए ‘अतीत के अक्षर-आस्था की धरोहर’ संग्रहालय में सुरक्षित रखवाया गया।

इस दौरान मुख्य मार्गदर्शक श्री दिगम्बर जैन दसानरसिंहपूरा समाज ऋषभदेव समाज के अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार वालावत, ट्रस्ट के संरक्षक भूपेन्द्र कोठारी, अध्यक्ष भरत जैन, महामंत्री सचिन जैन गनोडिया, उपाध्यक्ष मिथिलेश भंवरा, प्रतिक जैन, सुनिल लूणदिया, धनपाल दोवडिया सहित कई ट्रस्टी उपस्थित रहे।

प्रथम दृष्टया खंडित प्रतिमाओं में पार्श्वनाथ भगवान, मुनिसुव्रत नाथ भगवान, आदिनाथ भगवान और वासुपूज्य भगवान की प्रतिमाएं मानी जा रही हैं। इन प्रतिमाओं को करीब 15वीं से 17वीं सदी का माना जा रहा है। खंडित प्रतिमाएं कारछा मंदिर, पादेडी मंदिर और पीपली मंदिर की मानी जा रही हैं।

श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जवास (सौभाग्यधाम) में जैन खंडित प्रतिमाओं एवं अवशेषों के लिए संग्रहालय का निर्माण किया गया है। संग्रहालय में धीरे-धीरे प्रतिमाओं की संख्या बढ़ने से यात्रियों में प्राचीन धर्म की स्थिति जानने के प्रति उत्कंठा में उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। खंडित प्रतिमाओं का संग्रह अब अतीत की धार्मिक धरोहर को संरक्षित करने वाले इस संग्रहालय में सुरक्षित किया जा रहा है।

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