तस्वीर में ट्रेन कोच के सामने गेंदे की माला पहने यात्री खड़े हैं।

खेरवाड़ा। ऋषभदेव से जैन धर्म के शाश्वत मोक्षस्थल एवं आस्था के सर्वोच्च केंद्र श्री सम्मेद शिखरजी की पावन वंदना के लिए ऋषभदेव की अष्ट मंडली ग्रुप का 20 सदस्यीय दल दस दिवसीय धार्मिक यात्रा पर रवाना हुआ। पारस बानावत एवं सुदर्शन भवरा के नेतृत्व में शुरू हुई इस तीर्थयात्रा को लेकर जैन समाज में धार्मिक उल्लास और उत्साह का वातावरण है।

सम्मेद शिखरजी जैन धर्मावलंबियों की अटूट श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है। झारखंड स्थित पारसनाथ पर्वत की पवित्र वंदना प्रत्येक जैन धर्मावलंबी के जीवन की महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अभिलाषा मानी जाती है। मान्यता है कि 24 तीर्थंकरों में से 20 तीर्थंकरों ने इसी पावन भूमि से मोक्ष प्राप्त किया था। इसी कारण यह तीर्थ जैन समाज के लिए अनंत श्रद्धा, तप, त्याग और मोक्षमार्ग की प्रेरणा का केंद्र है।

अष्ट मंडली ग्रुप के 20 सदस्यीय दल की दस दिवसीय यात्रा केवल तीर्थदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामूहिक धार्मिक साधना, आपसी भाईचारे और जैन धर्म की गौरवशाली परंपराओं के प्रति समर्पण का भी प्रतीक है। यात्रा के दौरान दल के सदस्य भगवान के दर्शन, तीर्थ वंदना एवं धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करेंगे।

पारस बानावत एवं सुदर्शन भवरा के नेतृत्व में रवाना हुए दल के सदस्यों में विशेष उत्साह देखा गया। शाश्वत तीर्थ की पावन यात्रा को लेकर सभी यात्रियों में श्रद्धा और भक्ति का भाव है। दस दिवसीय यह यात्रा अष्ट मंडली ग्रुप के सदस्यों के लिए सामूहिक धार्मिक साधना और तीर्थ वंदना का अवसर बनी है।

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