तस्वीर में पारंपरिक वेशभूषा पहने कलाकार कल्याण वाटिका में गवरी लोकनाट्य प्रस्तुत करते हुए।

खेरोदा में मेवाड़ के प्रसिद्ध पारंपरिक लोकनाट्य ‘गवरी’ का भव्य मंचन हुआ। राजपूत समाज के चारभुजा नाथ मंदिर के सामने स्थित कल्याण वाटिका में मेनारिया समाज की ओर से मेनार की पारंपरिक गवरी का प्रदर्शन किया गया। रात्रिकालीन गवरी में कलाकारों ने धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक प्रसंगों पर आधारित विभिन्न खेलों की जीवंत प्रस्तुतियां दीं।

मंचन के दौरान कालू कीर, बंजारा, चौथ माता, राजा-रानी, कालिका माता, हत्या, डाडमा और कान्हा-गुजरी सहित कई लोकप्रिय खेल प्रस्तुत किए गए। कलाकारों ने प्रभावी संवाद और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप के साथ इन प्रसंगों को मंच पर जीवंत किया। कलाकारों के संवाद, वेशभूषा और अभिनय ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

रात्रि के समय आयोजित गवरी देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण कल्याण वाटिका पहुंचे। देर रात तक चले आयोजन के दौरान समूचा प्रांगण भक्ति और लोकसंस्कृति के उल्लास से सराबोर रहा। उपस्थित ग्रामीणों ने कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण को जरूरी बताया।

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