खेरवाड़ा पंचायत समिति में प्रधान पद को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस में संभावित दावेदारों के नाम सामने आने के साथ ही चुनावी समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा की ओर से पूर्व प्रधान अमृतलाल डामोर और अनिल कुमार डोडा के नाम चर्चा में हैं, जबकि कांग्रेस से पूर्व प्रधान सुंदरलाल असारी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। वहीं, निवर्तमान प्रधान पुष्पा मीणा की दावेदारी की संभावना भी बनी हुई है।

खेरवाड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में कुल 17 वार्डों में सदस्यों का निर्वाचन होना है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही अपने प्रत्याशियों को जिताने के लिए प्रयास कर रही हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद प्रधान पद के लिए राजनीतिक समीकरण किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

भाजपा की ओर से पूर्व प्रधान अमृतलाल डामोर और अनिल कुमार डोडा प्रधान पद के संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं। अमृतलाल डामोर वार्ड संख्या 15 से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि बावलवाड़ा उपतहसील क्षेत्र से अनिल कुमार डोडा वार्ड संख्या 3 से अपनी उम्मीदवारी जता रहे हैं। अनिल डोडा पूर्व प्रधान सूर्यप्रकाश डोडा के पुत्र हैं।

संगठनात्मक दृष्टि से खेरवाड़ा मंडल के अंतर्गत पंचायत समिति के 9 वार्ड और बावलवाड़ा मंडल के अंतर्गत 8 वार्ड आते हैं। ऐसे में दोनों दावेदारों का जोर अपने-अपने मंडल में अधिक से अधिक भाजपा प्रत्याशियों को जिताने पर है। प्रधान पद की दावेदारी के लिहाज से दोनों मंडलों का चुनावी प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से पूर्व प्रधान सुंदरलाल असारी को प्रधान पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। वे वार्ड संख्या 6 से चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा निवर्तमान प्रधान पुष्पा मीणा वार्ड संख्या 12 से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। यदि वे जीत हासिल करती हैं तो प्रधान पद के लिए उनकी दावेदारी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

इस चुनाव में भारत आदिवासी पार्टी ने भी अपने 10 उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। भाजपा और कांग्रेस के बोर्ड गठन की संभावनाओं के बीच बीएपी के प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर भी नजरें रहेंगी। पार्टी अपने अधिक से अधिक उम्मीदवारों को जिताने के प्रयास में जुटी है, ताकि त्रिशंकु बोर्ड की स्थिति बनने पर किंगमेकर की भूमिका निभा सके।

पंचायत समिति में प्रधान पद का फैसला केवल व्यक्तिगत दावेदारों की स्थिति पर निर्भर नहीं करेगा, बल्कि राजनीतिक दलों के संख्याबल और उनके बीच बनने वाले आपसी समीकरण भी अहम होंगे। किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में निर्दलीय सदस्यों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में समर्थन जुटाने, राजनीतिक समझौते और क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हो सकती हैं।

फिलहाल चुनाव प्रक्रिया पूरी होने और मतगणना के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किस दल के कितने सदस्य जीतकर आते हैं और खेरवाड़ा पंचायत समिति में प्रधान पद की दौड़ में किसकी स्थिति मजबूत होती है। भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ भारत आदिवासी पार्टी के 10 उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी प्रधान पद के अंतिम राजनीतिक समीकरण तय करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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