फतेहनगर में विजयादशमी पर RSS का विराट पथ संचलन, पुष्पवर्षा और आरती से हुआ भव्य स्वागत
फतेहनगर में विजयादशमी पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विराट पथ संचलन निकला। जिला प्रचारक गजेंद्र जी भाईसाहब ने राष्ट्र निर्माण और पंच परिवर्तन पर विचार रखे। जानिए डॉ. रविंद्र कुमार गोयल के संबोधन और नगर में हुए भव्य स्वागत की पूरी जानकारी।
फतेहनगर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्यक्रम।
फतेहनगर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की ओर से रविवार को विराट पथ संचलन निकाला गया। पूर्ण गणवेश में अनुशासित कदमताल करते स्वयंसेवकों का नगर में जगह-जगह पुष्पवर्षा, आरती और भव्य स्वागत द्वारों के माध्यम से अभिनंदन किया गया। नगरवासियों, मातृशक्ति, युवाओं और विभिन्न सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों की सहभागिता से आयोजन संपन्न हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, खण्ड फतेहनगर के तत्वावधान में आयोजित विजयादशमी उत्सव का शुभारंभ श्री द्वारिकाधीश मंदिर भूमि प्रांगण में हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रविंद्र कुमार गोयल उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता जिला संघचालक भारत सिंह झाला ने की। इस दौरान खण्ड संघचालक धनपाल सेठ और मुख्य बौद्धिककर्ता जिला प्रचारक गजेंद्र जी भाईसाहब का सान्निध्य रहा।
कार्यक्रम में जिला प्रचारक गजेंद्र जी भाईसाहब ने संघ के कार्य, स्वयंसेवकों के दायित्व और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा, "हम सौभाग्यशाली हैं कि हमारा जन्म भारत की भूमि पर हुआ। संघ कुछ नहीं करेगा और स्वयंसेवक कुछ नहीं छोड़ेगा।" उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य समाज के प्रत्येक व्यक्ति में राष्ट्र के प्रति कर्तव्यबोध, सामाजिक उत्तरदायित्व और संगठनात्मक चेतना जागृत करना है। संघ व्यक्ति निर्माण के माध्यम से समाज और राष्ट्र के सर्वांगीण उत्थान का कार्य करता है।
उन्होंने कहा कि संघ समाज से केवल समय मांगता है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर आशा और अपेक्षा से देख रही है। भारत के पास प्राचीन संस्कृति, समृद्ध परंपरा, ज्ञान और सामर्थ्य का विशाल भंडार है। आवश्यकता है कि लोग अपनी क्षमताओं को पहचानें और संगठित होकर भारत को विश्व में सर्वोच्च ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का उत्थान केवल शासन अथवा किसी एक संस्था के प्रयास से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय सहभागिता जरूरी है।
जिला प्रचारक ने अपने संबोधन में संघ की पंच परिवर्तन अवधारणा को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि समाज में व्यापक और स्थायी परिवर्तन के लिए प्रत्येक परिवार और नागरिक की सहभागिता आवश्यक है। पंच परिवर्तन के पांच प्रमुख आयाम कुटुम्ब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्व बोध हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. रविंद्र कुमार गोयल ने चिकित्सा सेवा के सामाजिक महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि चिकित्सा सेवा केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि मानवता की सेवा और समाज के प्रति दायित्व निभाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। चिकित्सक का दायित्व केवल रोगों का उपचार करना नहीं, बल्कि पीड़ित मानवता के प्रति सेवा और संवेदनशीलता का भाव रखना भी है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार स्वयं चिकित्सक थे। उन्होंने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन से ऊपर उठकर अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र और समाज के संगठन के लिए समर्पित किया। डॉ. गोयल ने कहा कि चिकित्सा सेवा और संघ का सेवा भाव दोनों ही समाज के प्रति समर्पण की भावना से प्रेरित हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी योग्यता और सामर्थ्य का उपयोग समाजहित एवं राष्ट्र निर्माण में करना चाहिए।
बौद्धिक कार्यक्रम के बाद पूर्ण गणवेश में सुसज्जित स्वयंसेवकों का विराट पथ संचलन श्री द्वारिकाधीश मंदिर भूमि प्रांगण से प्रारंभ हुआ। घोष की धुन पर कदमताल करते हुए स्वयंसेवक हिमालय बावजी, चंगेरी रोड, शिव मंदिर, कन्या पाठशाला, मंडी रोड, बस स्टैंड, मेन चौराहा, प्रताप चौराहा और स्टेडियम रोड से होते हुए पुनः श्री द्वारिकाधीश मंदिर भूमि प्रांगण पहुंचे, जहां संचलन का समापन हुआ।
निर्धारित मार्ग पर नगरवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विभिन्न स्थानों पर स्वागत द्वार सजाए गए थे। मातृशक्ति और महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से आरती उतारकर स्वयंसेवकों का अभिनंदन किया। वहीं, अनेक स्थानों पर पुष्पवर्षा कर पथ संचलन का स्वागत किया गया। विभिन्न सामाजिक एवं व्यावसायिक संगठनों, युवाओं और नगरवासियों ने भी आयोजन में उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई।
पथ संचलन के दौरान मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। उन्होंने अनुशासित कदमताल करते स्वयंसेवकों पर पुष्पवर्षा की और आरती उतारकर स्वागत किया। जगह-जगह सजे स्वागत द्वारों और मातृशक्ति की सक्रिय सहभागिता से नगर में उत्सव का माहौल रहा। घोष की धुन पर एक साथ कदम बढ़ाते स्वयंसेवकों का दृश्य भी नगरवासियों के आकर्षण का केंद्र रहा।
विजयादशमी उत्सव और विराट पथ संचलन के माध्यम से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संगठन, अनुशासन, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण का संदेश दिया। नगरवासियों की व्यापक सहभागिता और विभिन्न स्थानों पर हुए स्वागत ने आयोजन में सामाजिक एकजुटता एवं सांस्कृतिक चेतना की झलक प्रस्तुत की। व्यक्ति निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ संपन्न हुआ यह आयोजन संघ की सामाजिक सहभागिता और संगठनात्मक गतिविधियों का प्रमुख अवसर बना।