तस्वीर में खेरोदा की सड़क पर बेवाण के साथ शोभायात्रा निकालते श्रद्धालु दिखाई दे रहे हैं।

खेरोदा में जलझूलनी एकादशी का पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। विभिन्न समाजों के ठाकुरजी के भव्य बेवाण ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच निकले। मेनारिया, राजपूत, जाट, जनवा, माली और सारण समाज के चारभुजा नाथ के बेवाण शोभायात्रा में शामिल रहे। मुख्य मार्गों से गुजरती रामरेवाड़ियां ऐतिहासिक दुदेला तालाब पहुंचीं।

खेरोदा, 22 सितंबर 2026। खेरोदा कस्बे में जलझूलनी एकादशी का पावन पर्व हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर विभिन्न समाजों द्वारा ठाकुरजी के भव्य बेवाण निकाले गए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिरस से सराबोर नजर आया।

ढोल-नगाड़ों की थाप और जयकारों के साथ निकली शोभायात्रा में मेनारिया समाज, राजपूत समाज, जाट समाज, जनवा समाज, माली समाज और सारण समाज के चारभुजा नाथ के बेवाण शामिल रहे। मुख्य मार्गों से होते हुए भव्य रामरेवाड़ियां कस्बे के ऐतिहासिक दुदेला तालाब पर पहुंचीं।

दुदेला तालाब के तट पर वैदिक मंत्रोच्चार और विधिविधान के साथ ठाकुरजी का जलाभिषेक कर महाआरती की गई। बड़ी संख्या में जुटे श्रद्धालुओं ने भगवान चारभुजा नाथ के दर्शन किए और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

पूजा-अर्चना के बाद सभी भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया। इसके बाद बेवाण पुनः अपने-अपने निज मंदिरों में पधारे, जहां ठाकुरजी की महाआरती कर प्रसाद वितरण किया गया। जलझूलनी एकादशी पर निकली रामरेवाड़ियों और दुदेला तालाब पर हुए ठाकुरजी के स्नान ने खेरोदा में पर्व की पारंपरिक धार्मिक आस्था को जीवंत कर दिया।

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