तस्वीर में दिख रही महिलाएं खेरवाड़ा के मंदिर परिसर में बैठकर पूजा सामग्री के साथ नजर आ रही हैं।

खेरवाड़ा में जैन धर्मावलंबियों ने बुधवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि पर चंदन षष्ठी व्रत श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया। कस्बे के विभिन्न जैन मंदिरों में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के आयोजन हुए। बड़ी संख्या में महिलाओं ने व्रत रखते हुए जिनालय पहुंचकर भगवान की आराधना की।

व्रत के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक कर अष्टद्रव्य से पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही 108 बार णमोकार मंत्र का जाप किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने चंदन षष्ठी व्रत की कथा का श्रवण भी किया। मंदिरों में दिनभर धार्मिक वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना कर व्रत का लाभ लिया।

धार्मिक मान्यता के अनुसार चंदन षष्ठी व्रत का संबंध ईश्वर चंद्र सेठ एवं चंदना की कथा से माना जाता है। जैन धर्म में इस व्रत का विशेष आध्यात्मिक एवं नैतिक महत्व बताया गया है। व्रत के माध्यम से अशुभ कर्मों की निर्जरा, पापों के क्षय तथा क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों के त्याग की प्रेरणा मिलती है। श्रद्धालुओं ने आत्मसंयम, शुद्ध आचरण एवं धार्मिक भावनाओं के साथ व्रत का पालन किया।

मान्यता है कि विधि-विधानपूर्वक छह वर्षों तक चंदन षष्ठी व्रत करने एवं उद्यापन करने से जीव को उत्तम गति की प्राप्ति होती है तथा मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है। चंदन षष्ठी के अवसर पर जैन मंदिरों में हुई विशेष पूजा-अर्चना और व्रत ने धार्मिक आस्था, आत्मसंयम एवं आध्यात्मिक साधना के महत्व को रेखांकित किया।

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