तस्वीर में सवाई माधोपुर के तेरापंथ भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बाएं से दाएं उपासक पारसमल दुगड़ और सहयोगी उपासक रमेश कुमार सिंघवी नजर आ रहे हैं.

पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन सवाई माधोपुर के आदर्श नगर स्थित तेरापंथ भवन में व्रत चेतना दिवस मनाया गया। इस अवसर पर प्रवक्ता उपासक पारसमल दुगड़ ने कहा कि व्रत चेतना दिवस आत्मा की जागृति का महत्वपूर्ण दिन है और व्रत का अर्थ केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि वृत्ति पर जीत हासिल करना है।

श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा आदर्श नगर, सवाई माधोपुर के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में उपासक पारसमल दुगड़ ने कहा कि पर्युषण पर्व जैन धर्म में आत्मशोधन का महापर्व है। इसे आत्मा का कल्पवृक्ष कहा गया है। तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्य श्री तुलसी द्वारा प्रदत्त अणुव्रत अभियान एक महत्वपूर्ण अवदान है। व्रत चेतना दिवस अणुव्रत के उन छोटे-छोटे नियमों को समझने का अवसर है, जो जीवन को उन्नत बनाने वाले हैं।

उन्होंने कहा कि व्रत का अर्थ केवल भूखा रहना नहीं है। भूख लगने के बावजूद भोजन न करना जिह्वा व्रत है। क्रोध आने पर भी गुस्सा न करना कषाय व्रत है और लोभ सताने के बावजूद संतोष रखना संतोष व्रत है। आचार्य श्री महाश्रमण जी के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "व्रत देह को नहीं, मन को तपाता है। मन तपा तो कर्म जला।"

उपासक पारसमल दुगड़ ने कहा कि तेरापंथ की परिभाषा में व्रत, अणुव्रत और महाव्रत की श्रृंखला है। श्रावक अणुव्रती बनकर धीरे-धीरे महाव्रत की ओर बढ़ता है। पर्युषण के 8 दिनों में श्रावक-श्राविकाएं अपनी शक्ति अनुसार एकासन, आयम्बिल, उपवास, बेला, तेला, अठाई आदि तप करते हैं।

उन्होंने कहा कि व्रत चेतना दिवस यह याद दिलाता है कि तप केवल पेट का नहीं, पाप का भी होना चाहिए। आचार्य भिक्षु के कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, "छोटा व्रत भी बड़े पाप को रोक देता है।"

इस अवसर पर सहयोगी उपासक रमेश कुमार सिंघवी ने भी प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आज भौतिकता की आंधी है। आदमी सब कुछ खाना चाहता है, सब कुछ पाना चाहता है और सब कुछ देखना चाहता है। इस 'सब कुछ' की दौड़ में वह खुद को खो रहा है। व्रत चेतना दिवस का संदेश है, "थोड़ा कम करो, थोड़ा संयम करो।"

रमेश कुमार सिंघवी ने कहा कि जो जीभ पर संयम करता है, वह बीमारी से बचता है। जो मन पर संयम करता है, वह से बचता है। जो इच्छाओं का संयम करता है, वह गरीब होते हुए भी अमीर है। व्रत चेतना दिवस पर केवल भाषण नहीं, संकल्प होना चाहिए। व्रत लेना कठिन नहीं, निभाना कठिन है। जो इसे निभा लेता है, वही तर जाता है।

उन्होंने कहा कि पर्युषण में व्रत की चेतना ही संवत्सरी की क्षमा तक ले जाती है। व्रत से आत्मा पवित्र होती है और पवित्र आत्मा ही क्षमा देने योग्य बनती है।

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