श्यारौली में 20 दिन से जलभराव, समाजसेवी बलराम सिंह धनवाल ने प्रशासन से मांगा स्थायी समाधान
श्यारौली में 20 दिन से गंगापुर-हिंडौन सड़क पर जलभराव से परेशानी, बलराम सिंह धनवाल ने नाले तक निकासी और प्रशासन से तत्काल समाधान की मांग की।
तस्वीर में दिख रहा है सड़क पर जलभराव और दोनों तरफ पेड़-पौधे।
गंगापुर-हिंडौन मुख्य सड़क पर करीब 20 दिन से जलभराव की समस्या बनी हुई है। श्यारौली गांव में सड़क पर जमा पानी के कारण राहगीरों, ग्रामवासियों, श्री भैरवनाथ जी मंदिर जाने वाले यात्रियों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समाजसेवी बलराम सिंह धनवाल ने एक बार फिर प्रशासन से जनहित में जलभराव की उचित निकासी तत्काल कराने की अपील की है। उन्होंने आरोप लगाया कि समस्या के समाधान में संबंधित प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है।
बलराम सिंह धनवाल के अनुसार जलभराव का मुख्य कारण संबंधित स्थान पर सड़क को नीचा बनाया जाना, पानी निकासी के लिए डिस्पोजल पॉइंट नहीं बनाया जाना और जिस स्थान पर पानी रुक रहा है, वहां सड़क को ऊंचा बना दिया जाना है। उनका कहना है कि इस स्थिति के कारण सड़क पर पानी जमा हो रहा है और आवागमन प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने जलभराव के सबसे आसान और उचित समाधान के रूप में सड़क के दोनों किनारों पर बनी नालियों को वजीरपुर की ओर श्री कल्लाकी बालाजी मंदिर के पास तक बढ़ाने की मांग की है। उनके अनुसार मंदिर के पास गैर मुमकिन नाला मौजूद है, जिसका खसरा नंबर 1477 है और इसमें पानी की निकासी आसानी से की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि सड़क की कुल भूमि की चौड़ाई 84 फीट है, जो लगभग नाले तक पहुंच जाती है। उनका कहना है कि सड़क वाले विभाग के पास पानी निकासी के लिए भूमि उपलब्ध है। यदि किसी की खातेदारी भूमि से भूमि लेने की आवश्यकता पड़ती है तो प्रशासन द्वारा उचित मुआवजा दिया जाएगा।
बलराम सिंह धनवाल ने कहा कि गांव के कुछ लोग प्रशासन को गुमराह करने के लिए आबादी के अंदर से पानी निकासी की बात करते हैं। उनका कहना है कि ऐसे लोगों का तर्क है कि पहले पानी आबादी के अंदर से निकलता था, लेकिन वे यह नहीं बताते कि पानी आखिरकार इसी नाले में जाता था और उस मार्ग में पहले न के बराबर आबादी क्षेत्र था।
उन्होंने कहा कि पहले आबादी के अंदर से पानी जाने का मुख्य कारण यह था कि पीडब्ल्यूडी की सड़क आबादी के अंदर से निकलती थी। अब मेगा हाईवे बनने के बाद पानी निकासी के लिए नालियां बनी हुई हैं, लेकिन डिस्पोजल पॉइंट नहीं बनाया गया है। इसी कारण पानी की निकासी नहीं हो पा रही है।
उन्होंने आबादी के अंदर से पानी निकासी की मांग करने वालों से उचित समाधान के लिए प्रशासन का सहयोग करने और प्रशासन को गुमराह नहीं करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि आबादी के अंदर सड़कें ऊंची बनाई गई हैं तो यह सही है, ताकि सड़क का पानी आबादी के अंदर न जाकर सड़क के किनारे-किनारे गैर मुमकिन नाले तक पहुंच सके। उनका कहना है कि आबादी के अंदर से भी पानी इसी नाले में जाता आया है। यदि आबादी के अंदर से पानी किसी दूसरे उचित स्थान पर जाता है तो इस दावे में कुछ आधार बनता है, अन्यथा इसका कोई आधार नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि पानी की निकासी आबादी के अंदर से की जाती है तो आमजन को भारी नुकसान होगा। आबादी के अंदर का मार्ग भी संकरा है, जबकि पाइप लाइन अभी नई डाली गई है और नल कनेक्शन भी किए गए हैं। उनके अनुसार, यदि आबादी के अंदर से पानी निकासी की बात को सही मानकर प्रशासन कार्रवाई करता है तो आमजन और प्रशासन दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, जो पूरी तरह अनुचित होगा।
बलराम सिंह धनवाल ने प्रशासन से पुनः मांग की कि जनहित को ध्यान में रखते हुए सड़क के किनारे-किनारे ही पानी की उचित निकासी की व्यवस्था की जाए। उन्होंने लोगों से भी आग्रह किया कि उचित समाधान के लिए प्रशासन को बाध्य करने में सहयोग करें और आबादी के अंदर से पानी निकासी की बात करना बंद करें।
उन्होंने कहा कि गत वर्ष कुछ लोगों के बहकावे में आकर प्रशासन ने आबादी और कृषि भूमि के बीच से गलत तरीके से पानी की निकासी की थी, जिससे आमजन को भारी नुकसान हुआ। उन्होंने अपील की कि अब ऐसा अन्याय करवाने का प्रयास न किया जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि इस बार गाज गिर सकती है।
बलराम सिंह धनवाल ने अपनी अपील का समापन करते हुए कहा कि उचित समाधान में ही सभी का भला है और जनहित को ध्यान में रखते हुए जलभराव की समस्या का स्थायी एवं उचित निकासी मार्ग सुनिश्चित किया जाना चाहिए।