तस्वीर में बाएं 18 वर्षीय आरोपी भवानी सिंह मीणा और दाएं पुलिस टीम में शामिल कांस्टेबल संजीव हैं, जिन्हें वजीरपुर थाना पुलिस ने नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में मेड़ी गांव से पकड़ा है।   

सवाई माधोपुर जिले के वजीरपुर थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका से छेड़छाड़, अश्लील इशारे करने और बाइक से टक्कर मारने का प्रयास करने के आरोप में पुलिस ने 18 वर्षीय युवक भवानी सिंह मीणा को गिरफ्तार किया है। सवाई माधोपुर पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी आईपीएस के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई में आरोपी को मुखबिर की सूचना पर ग्राम मेड़ी से पकड़ा गया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सेक्टर गंगापुर सिटी नारायण लाल तिवाड़ी और वृत्ताधिकारी गंगापुर सिटी गिर्राज मीणा के निकटतम सुपरविजन में वजीरपुर थाना प्रभारी उपनिरीक्षक राजवीर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपी की पहचान भवानी सिंह मीणा पुत्र विक्रम सिंह, उम्र 18 वर्ष 10 माह, निवासी खंडीप, थाना वजीरपुर, जिला सवाई माधोपुर के रूप में हुई है।

मामले की शुरुआत 14 अक्टूबर 2026 को दर्ज कराई गई लिखित रिपोर्ट से हुई। परिवादी विक्रम सिंह पुत्र किरोड़ीलाल, उम्र 40 वर्ष, जाति मीणा, निवासी पलात पट्टी खंडीप, थाना वजीरपुर, जिला सवाई माधोपुर ने पुलिस को बताया कि 11 अक्टूबर 2026 को शाम के समय उनकी पुत्री ने उन्हें जानकारी दी कि भवानी पुत्र विक्रम हांडा स्कूल आते-जाते समय उसे परेशान करता है। आरोप है कि युवक अश्लील इशारे करने के साथ अश्लील टिप्पणियां भी करता था।

परिवादी के अनुसार, उनकी पुत्री ने यह भी बताया कि आरोपी ने उसके साथ गलत तरीके से छूने का प्रयास किया और बाइक से टक्कर मारने की कोशिश की। बालिका किसी तरह खुद को बचाकर वहां से निकल गई। इन घटनाओं के कारण वह भयभीत थी और परिवादी को उसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता थी।

शिकायत में परिवादी ने यह आशंका भी जताई कि आरोपी अन्य छोटी बच्चियों को भी परेशान करता है। उन्हें जानकारी मिली थी कि भवानी के मोबाइल फोन में अन्य छोटी बच्चियों के वीडियो मौजूद हैं। परिवादी ने आशंका व्यक्त की कि इन वीडियो का दुरुपयोग किया जा सकता है या बच्चियों को ब्लैकमेल करने के लिए उनका इस्तेमाल हो सकता है। उन्होंने आरोपी के मोबाइल फोन की विधिसम्मत जांच कराने और वीडियो की प्रकृति तथा उनके संभावित दुरुपयोग की निष्पक्ष जांच करने की मांग की थी। साथ ही, यदि जांच में आपत्तिजनक सामग्री या नाबालिग बच्चियों के शोषण से संबंधित साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई करने और बच्चियों की पहचान व निजता सुरक्षित रखने का अनुरोध किया था।

परिवादी ने रिपोर्ट में बताया कि 11 अक्टूबर 2026 की शाम वह इस मामले में बातचीत करने और समझाने के लिए संबंधित व्यक्तियों के घर गए थे। आरोप है कि वहां भवानी, उसके पिता विक्रम और अन्य संबंधित व्यक्तियों ने उनके साथ गाली-गलौज की तथा अभद्र व्यवहार किया। परिवादी का कहना था कि वह अपनी पुत्री की सुरक्षा के संबंध में बात करने गए थे, लेकिन इस घटना के बाद उन्हें अपनी और अपनी पुत्री की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता होने लगी।

उन्होंने आशंका जताई कि समय रहते उचित कार्रवाई नहीं होने पर उनकी पुत्री और अन्य नाबालिग बच्चियों के साथ कोई गंभीर घटना हो सकती है। इसी आधार पर उन्होंने बालिका से जुड़ी घटनाओं, कथित छेड़छाड़, अश्लील इशारों और टिप्पणियों, बाइक से टक्कर मारने के प्रयास तथा उनके साथ हुई गाली-गलौज की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच, साक्ष्य और गवाहों के बयान दर्ज करने तथा दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने का भी अनुरोध किया।

शिकायत में आरोपी के मोबाइल फोन में बताए गए अन्य बच्चियों के वीडियो की विधिसम्मत जांच कराने और आपत्तिजनक सामग्री अथवा ब्लैकमेलिंग से संबंधित साक्ष्य मिलने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग भी शामिल थी। परिवादी ने अपनी पुत्री और अन्य बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन्हें परेशान करने या धमकाने से रोकने के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाने का आग्रह किया था।

पुलिस की कार्रवाई के विवरण के अनुसार, वजीरपुर थाने में मुकदमा नंबर 185/2026 भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2), 78(2), 352 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 11/12 के तहत दर्ज है। घटना के बाद फरार आरोपी भवानी सिंह मीणा को मुखबिर से मिली विशेष सूचना के आधार पर ग्राम मेड़ी से हिरासत में लिया गया। जांच के दौरान आरोपों के तहत अपराध प्रमाणित पाए जाने पर उसे नियमानुसार गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, मामले में अनुसंधान जारी है।

इस कार्रवाई में वजीरपुर थाने के उपनिरीक्षक राजवीर सिंह, उपनिरीक्षक विमल कुमार, हेड कांस्टेबल पवन (1287), कांस्टेबल जितेंद्र सिंह (1381) और कांस्टेबल संजीव (577) शामिल रहे। पुलिस ने संजीव, कांस्टेबल नंबर 577 की विशेष भूमिका बताई है। मामले की जांच के दौरान बालिका की सुरक्षा, शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं पर अनुसंधान जारी है।

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