तस्वीर में बौंली के शिव बगीची प्रांगण में आयोजित 11 दिवसीय रामलीला के दौरान कलाकार विभिन्न प्रसंगों का मंचन करते हुए नजर आ रहे हैं।   

बौंली, बामनवास। शिव बगीची स्थित श्री राम कला मंडल मंच बौंली के प्रांगण में आयोजित 11 दिवसीय रामलीला का रावण, कुंभकरण और मेघनाथ वध के साथ समापन हो गया। अंतिम दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक की लीला का मंचन किया गया, जिसमें रामायण के प्रमुख प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

रामलीला मंचन से पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रतनलाल पोसवाल, पूर्व अध्यक्ष कमलेश देवी जोशी एवं समाजसेवी ओम प्रकाश जोशी ने भगवान की महाआरती उतारी। इसके बाद रामलीला के अंतिम दिन की प्रस्तुतियों का शुभारंभ हुआ।

मंचन के दौरान सर्वप्रथम रावण द्वारा कुंभकरण को निद्रा से जगाकर युद्ध में भेजने का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। युद्ध में कुंभकरण के वध के बाद मेघनाथ निकुंबला माता के मंदिर में यज्ञ करने पहुंचा। इसकी सूचना मिलने पर लक्ष्मण जी हनुमान, अंगद, सुग्रीव और विभीषण की सेना के साथ वहां पहुंचे। सेना ने मेघनाथ के यज्ञ को विध्वंस किया, जिसके बाद मेघनाथ के वध की लीला का मंचन किया गया।

इसके बाद रावण वध का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। भक्त विभीषण ने भगवान श्रीराम को रावण की मृत्यु नहीं होने का कारण उसकी नाभि में स्थित अमृत कुंड बताया। इसके बाद भगवान श्रीराम ने अग्निबाण चलाकर रावण का वध किया। इस प्रसंग के मंचन के साथ रामलीला में बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश प्रस्तुत किया गया।

रावण वध के बाद भगवान श्रीराम के अयोध्या पहुंचने और उनके राज्याभिषेक की लीला का मंचन हुआ। इसी के साथ शिव बगीची स्थित श्री राम कला मंडल मंच बौंली में चल रही 11 दिवसीय रामलीला का समापन हो गया।

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