मुंबई के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘कोस्टल रोड’ पर रविवार को हुए भीषण हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस मार्ग पर वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और हादसों को रोकने के लिए बीएमसी और मुंबई ट्रैफिक पुलिस ने आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में कोस्टल रोड पर ओवर-स्पीडिंग यानी तेज रफ्तार वाहनों पर डिजिटल निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया गया है।

फैसले के अनुसार, कोस्टल रोड पर 21 नए हाई-टेक कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों के जरिए तेज रफ्तार वाहनों पर नजर रखी जाएगी और ओवर-स्पीडिंग करने वाले चालकों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल कोस्टल रोड पर केवल 7 सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे हैं, जो इस विशाल समुद्री मार्ग की निगरानी के लिए बेहद कम हैं।

मौजूदा कैमरों की क्षमता भी 170 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार तक सीमित है। इससे अधिक रफ्तार से गुजरने वाले वाहनों की गति कैमरे दर्ज नहीं कर पाते थे। इसके अलावा मौजूदा कैमरों में आधुनिक नंबर प्लेट पहचानने वाली तकनीक नहीं होने के कारण ट्रैफिक पुलिस को कार्रवाई करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

प्रशासन के नए फैसले के बाद कोस्टल रोड पर 21 नए हाई-रिज़ॉल्यूशन और आधुनिक तकनीक वाले कैमरे लगाए जाएंगे। इसके बाद मार्ग पर कैमरों की कुल संख्या बढ़कर 28 हो जाएगी। इन सभी कैमरों को सीधे मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई वाहन तय सीमा से अधिक रफ्तार से गुजरेगा, कैमरे उसकी नंबर प्लेट तुरंत स्कॅन करेंगे और ऑनलाइन ई-चालान काट दिया जाएगा। बीएमसी और पुलिस को उम्मीद है कि इस सख्त निगरानी व्यवस्था से कोस्टल रोड पर बेकाबू रफ्तार से वाहन चलाने वाले चालकों पर लगाम लगेगी। हादसे के बाद लिया गया यह प्रशासनिक फैसला मार्ग पर तेज रफ्तार वाहनों की निगरानी और यातायात नियमों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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