मुंबई में बंद पड़े कबूतरखानों को दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। राष्ट्रसंत मुनि नीलेशचंद्र जी महाराज ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से मुलाकात कर चेतावनी दी है कि शहर के कबूतरखाने जल्द शुरू नहीं किए गए तो वे आमरण अनशन शुरू करेंगे। वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी मनसे ने इस मांग का कड़ा विरोध करते हुए सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने की अनुमति नहीं देने की बात कही है।

मुनि नीलेशचंद्र जी महाराज का आरोप है कि आश्वासन मिलने के बावजूद पायधुनी स्थित ऐतिहासिक जैन मंदिर के आसपास और शहर के अन्य कबूतरखाने अब भी बंद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार वे केवल आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे। मांग पूरी नहीं होने पर उन्होंने पायधुनी में अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है।

दूसरी ओर मनसे नेता संदीप देशपांडे और स्थानीय पदाधिकारियों ने लोगों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कबूतरखाने दोबारा शुरू करने की मांग का विरोध किया है। मनसे का कहना है कि कबूतरों की बीट से फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियां फैलती हैं। पार्टी के अनुसार आम नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ नहीं किया जा सकता।

मनसे ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर मांग की है कि यदि कबूतरों को दाना डालने की व्यवस्था करनी ही है तो इसके लिए निजी मैदानों या सोसायटियों की छतों का इस्तेमाल किया जाए। सार्वजनिक सड़कों, पार्कों और चौकों पर दबाव में आकर कबूतरखाने शुरू किए जाने पर पार्टी ने विरोध करने की चेतावनी दी है।

कबूतरखानों को दोबारा शुरू करने की मांग और सार्वजनिक स्थानों पर कबूतरों को दाना डालने के विरोध के बीच यह मुद्दा नागरिकों के स्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं के बीच विवाद का विषय बन गया है। मुंबई में कबूतरखानों को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग रुख के कारण यह विवाद एक बार फिर सामने आया है।

Tags: