सत् साहित्य के स्वाध्याय से होती है कर्मों की निर्जरा, डोंबिवली में मनाया स्वाध्याय दिवस
डोंबिवली के तेरापंथ भवन में पर्युषण पर्व का दूसरा दिन स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाया गया। उपासक अर्जुन मेड़तवाल और गेहरीलाल बाफना ने स्वाध्याय, ज्ञान और कर्मों की निर्जरा के महत्व पर विचार रखे।
तस्वीर में डोंबिवली के तेरापंथ भवन में आयोजित पर्युषण पर्व के दौरान मंच पर बैठे हुए उपासक अर्जुन मेड़तवाल और गेहरीलाल बाफना नजर आ रहे हैं।
तेरापंथ भवन, डोंबिवली में पर्वाधिराज पर्युषण के दूसरे दिन ‘स्वाध्याय दिवस’ के रूप में विशेष आयोजन किया गया। महातपस्वी युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से समागत उपासक द्वय अर्जुन मेड़तवाल एवं गेहरीलाल बाफना के निर्देशन में पर्युषण पर्वाधिराज का दूसरा दिवस स्वाध्याय दिवस के रूप में मनाया गया।
इस अवसर पर उपस्थित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवक्ता उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि पर्युषण पर्व एक ऐसा कल्पवृक्ष है, जिसकी छत्रछाया में जीवन को साधना पथ पर अग्रसर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमें ऐसे महान एवं प्रतापी आचार्यों का नेतृत्व मिला, जो महान साहित्य सर्जक रहे हैं।
अर्जुन मेड़तवाल ने बताया कि आचार्य श्भिक्षु ने 38000 पद्य परिमाण साहित्य का सृजन किया। तेरापंथ के चतुर्थ आचार्य आचार्य जयाचार्य ने साढ़े तीन लाख पद्य परिमाण साहित्य का सृजन किया। आचार्य श्री तुलसी ने पद्य साहित्य एवं आचार्य श्री महाप्रज्ञ ने गद्य साहित्य के क्षेत्र में न केवल तेरापंथ धर्मसंघ, बल्कि संपूर्ण साहित्य जगत को अनमोल उपहार दिए।
उन्होंने कहा कि सत् साहित्य का स्वाध्याय करने से जहां ज्ञान बढ़ता है, वहीं पूर्व संचित कर्मों की विपुल निर्जरा होती है। स्वाध्याय शब्द का अर्थ ‘स्व का अध्ययन करना’ है। उन्होंने कहा कि अपने आपको देखने और अपनी आत्मा का परिमार्जन करने का सतत प्रयत्न करते रहना चाहिए।
सहयोगी उपासक गेहरीलाल बाफना ने कहा कि स्वाध्याय बहुत बड़ा तप है। यह ऐसा तप है, जिसे हर कोई कर सकता है। हर एक व्यक्ति उपवास, बेला, तेला, अठ्ठाई या मासखमण नहीं कर सकता, लेकिन ग्रंथों या पुस्तकों के माध्यम से स्वाध्याय हर कोई व्यक्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में ज्ञान की प्राप्ति करना प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य होता है, क्योंकि ज्ञान ही ऐसा तत्व है, जो आदमी को विकास के शिखर तक पहुंचाता है। मोक्ष प्राप्त करने का एक सशक्त माध्यम स्वाध्याय है।
तेरापंथी सभा, डोंबिवली के अध्यक्ष मदन कोठारी ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए स्वाध्याय के संदर्भ में अपने विचार प्रस्तुत किए। इस प्रकार पर्युषण पर्व के दूसरे दिन स्वाध्याय को आत्मचिंतन, ज्ञानवृद्धि और कर्मों की निर्जरा के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में रेखांकित किया गया।