तस्वीर में मुंबई के एक अस्पताल के बाहर हाथों में तख्तियां लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए रेजिडेंट डॉक्टर नजर आ रहे हैं।

मुंबई के महानगरपालिका अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल के कारण इलाज कराने पहुंच रहे हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ‘बीएमसी मार्ड’ संगठन के आह्वान पर डॉक्टरों ने केईएम, सायन, नायर और कूपर जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद कर दी हैं।

ओपीडी सेवाएं ठप होने से दूर-दराज क्षेत्रों से जांच और इलाज के लिए पहुंचे कई मरीजों को बिना उपचार के वापस लौटना पड़ा। वहीं, कई मरीजों को इलाज के लिए महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।

रेजिडेंट डॉक्टरों ने यह हड़ताल महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा ‘सीसीएमपी’ योग्यता प्राप्त बीएचएमएस डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने के विरोध में शुरू की है। ‘बीएमसी मार्ड’ का आरोप है कि होम्योपैथी पृष्ठभूमि वाले डॉक्टरों को एलोपैथिक प्रैक्टिस के लिए रजिस्ट्रेशन देना मरीजों की सुरक्षा के साथ समझौता है और इससे आधुनिक चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।

हड़ताली रेजिडेंट डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि सीसीएमपी उत्तीर्ण बीएचएमएस डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही बॉम्बे हाई कोर्ट के अंतिम फैसले तक इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाए। इसके अलावा रेजिडेंट डॉक्टरों की अन्य लंबित मांगों पर सरकार तुरंत सकारात्मक बातचीत शुरू करे।

हालांकि, मरीजों के लिए राहत की बात यह है कि ओपीडी सेवाएं बंद रहने के बावजूद अस्पतालों के आपातकालीन विभाग, आईसीयू, कैजुअल्टी, प्रसूति विभाग और भर्ती मरीजों का इलाज पहले की तरह जारी है।

हड़ताली डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर प्रशासन और सरकार ने विवादित रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को स्थगित नहीं किया, तो आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा। ऐसे में आने वाले दिनों में सामान्य मरीजों की परेशानियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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