बीएमसी महापौर बंगले के 2.89 करोड़ टेंडर पर विवाद, रितु तावड़े ने रद्द कराया प्रस्ताव
बीएमसी महापौर बंगले के 2.89 करोड़ रुपये के टेंडर पर विवाद, रितु तावड़े ने प्रस्ताव रद्द कराया, विपक्ष ने लगाए फिजूलखर्ची के आरोप।
मुंबई में रानी बाग स्थित महापौर के ऐतिहासिक बंगले के नवीनीकरण को लेकर बीएमसी में नया सियासी विवाद खड़ा हो गया है। महज चार महीनों के भीतर बीएमसी की ओर से दूसरा नवीनीकरण टेंडर जारी किए जाने पर विपक्ष ने भाजपा के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन पर आम मुंबईकरों के टैक्स के पैसों की फिजूलखर्ची का आरोप लगाया है।
विवाद बढ़ने के बाद मुंबई की महापौर रितु तावड़े ने इस मामले पर सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि प्रस्तावित काम महापौर निवास के अंदर का नहीं, बल्कि आसपास के परिसर और रानी बाग क्षेत्र से संबंधित था। इसके साथ ही उन्होंने बीएमसी के उद्यान विभाग को विवादित टेंडर तत्काल रद्द करने के निर्देश दिए।
यह 2.89 करोड़ रुपये का टेंडर ऐसे समय जारी किया गया था, जब बीएमसी ने चार महीने पहले ही इस हेरिटेज बंगले की मरम्मत पर 2.4 करोड़ रुपये खर्च किए थे। महापौर कार्यालय ने स्पष्ट किया कि हेरिटेज बंगले के अंदर का पूरा काम केवल बीएमसी का हेरिटेज मेंटेनेंस विभाग करता है, जबकि नया टेंडर चिड़ियाघर परिसर से जुड़े कार्यों के लिए जारी किया गया था।
हालांकि, विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सत्ताधारी गठबंधन पर हमला तेज कर दिया। बीएमसी में कांग्रेस दल के नेता अशरफ आजमी ने आरोप लगाया कि जब मुंबई की जनता गड्ढों, गंदे नालों, अस्पतालों, स्कूलों और जर्जर फुटपाथों जैसी समस्याओं का सामना कर रही है, तब महापौर के बंगले पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने पूरे खर्च की पारदर्शी जांच की मांग की।
शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि बीएमसी मुंबईकरों की मेहनत की कमाई को भाजपा महापौर की इच्छाएं पूरी करने में बर्बाद कर रही है। वहीं, पूर्व महापौर और बीएमसी में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने कहा कि अचानक टेंडर वापस लेने से इस पूरे मामले को लेकर संदेह और बढ़ गया है।
शिवसेना के समूह नेता अमेय घोले ने भी मांग की कि जांच की जाए कि यह टेंडर किसने मंजूर किया था। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठाई है।
इन आरोपों को खारिज करते हुए महापौर रितु तावड़े ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) राजनीतिक फायदे के लिए उद्यान विभाग के टेंडर को महापौर बंगले से जोड़कर एक झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दोहराया कि यह प्रस्ताव चिड़ियाघर के विकास कार्यों के लिए था, न कि उनके सरकारी आवास के लिए।
करीब 6,000 वर्ग फुट में फैला यह ऐतिहासिक बंगला वर्ष 1931 में बना था। इसके आसपास साउंड बैरियर, कॉन्फ्रेंस हॉल, जल निकासी व्यवस्था और कर्मचारी आवास जैसे बुनियादी ढांचों के विकास का प्रस्ताव था। टेंडर रद्द होने के बाद अब इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।