बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में प्रशासनिक नियमों की अनदेखी कर बिना सार्वजनिक टेंडर प्रक्रिया अपनाए सीधे ठेका दिए जाने का मामला सामने आया है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री के 300 करोड़ वृक्षारोपण अभियान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 2 से 3 मिनट की एक लघु वीडियो फिल्म तैयार कराई गई। इस कार्य के लिए बीएमसी के जनसंपर्क विभाग ने किसी भी सार्वजनिक टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना 4 लाख 72 हजार रुपये का ठेका एक एजेंसी को सौंप दिया। अब कार्य पूरा होने के बाद इस खर्च को स्थायी समिति से मंजूरी दिलाने के लिए प्रस्ताव लाया गया है, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है।

बीएमसी के नियमों के अनुसार 3 लाख रुपये से अधिक के किसी भी कार्य के लिए अखबारों में विज्ञापन जारी कर ई-टेंडर आमंत्रित करना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके बावजूद इस मामले में किसी भी सार्वजनिक विज्ञापन के बिना केवल कुछ कंपनियों से मौखिक बातचीत की गई और ईमेल के माध्यम से दरें मंगाई गईं। इनमें 'मेसर्स ओशन फिल्म्स प्रा. लि.' द्वारा दिए गए 4.72 लाख रुपये के प्रस्ताव को सबसे कम बताते हुए सीधे कार्य आवंटित कर दिया गया।

प्रशासन ने इस प्रक्रिया के समर्थन में तर्क दिया है कि यह कार्य अत्यंत आवश्यक था और निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाना था। इसी कारण सार्वजनिक विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया अपनाना व्यावहारिक नहीं था।

हालांकि, कार्य पूरा होने के बाद खर्च को मंजूरी के लिए प्रस्तुत करने की इस कार्यप्रणाली पर बीएमसी की स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे और अन्य सदस्यों ने पहले भी कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि बिना टेंडर के मनपसंद लोगों को कार्य सौंपने और बाद में मंजूरी मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ जांच कराई जाएगी। इसके बावजूद जनसंपर्क विभाग द्वारा ऐसा प्रस्ताव लाए जाने पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थायी समिति के सदस्य जमीर कुरेशी ने भी इस मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि महज 3 मिनट की फिल्म के लिए 4.72 लाख रुपये खर्च करना बीएमसी के धन की बर्बादी है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस फिल्म की शूटिंग विदेशों में की गई थी। विरोधियों का कहना है कि वे स्थायी समिति की आगामी बैठक में प्रशासन से इस पूरे मामले का विस्तृत हिसाब मांगेंगे। यह मामला अब बीएमसी की ठेका प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।

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