मुंबई को गोवा से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-66 के चौड़ीकरण का काम 17 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। सूचना के अधिकार यानी आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही देरी के कारण 355 किलोमीटर लंबे इस हाईवे की परियोजना लागत में करीब 5,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसकी मूल मंजूर लागत 11,409 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 16,909 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। अब तक इस सड़क पर 11,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए जा चुके हैं, इसके बावजूद हाईवे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों का निर्माण बाकी है।

मुंबई-गोवा हाईवे का काम अधूरा रहने से कोंकण जाने वाले लोगों की परेशानी लगातार बनी हुई है। हर साल गणेशोत्सव जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मुंबई से गांव जाने वाले लाखों यात्रियों को इस मार्ग पर भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सड़कों पर पड़े गड्ढों, अधूरे पुलों और यातायात जाम के कारण करीब 7 घंटे का सफर 12 से 15 घंटे तक पहुंच रहा है।

खस्ताहाल सड़क के कारण होने वाले भीषण हादसे भी चिंता का विषय बने हुए हैं। स्रोत के अनुसार, ऐसे हादसों में हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। हाईवे का निर्माण पूरा नहीं होने से यात्रियों को लंबी यात्रा, यातायात जाम और सड़क की खराब स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

परियोजना की बढ़ती लागत और निर्माण में हो रही देरी को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि राज्य में 701 किलोमीटर लंबा नया समृद्धि महामार्ग महज सात सालों में बनकर तैयार हो गया, जबकि मुंबई-गोवा हाईवे 17 साल बाद भी अधूरा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, काम की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में बंटी होने और लापरवाही के कारण कोंकण के आम नागरिकों को हादसों, यातायात जाम और मानसिक तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। जनता अब सरकार से इस देरी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है। 17 साल की देरी, 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ी लागत और अब तक 11,500 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने के बावजूद हाईवे के महत्वपूर्ण हिस्सों का अधूरा रहना इस परियोजना की मौजूदा स्थिति को सामने रखता है।

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