गणपति मंडपों को मिले स्थायी जगह का हक, महासंघ ने CM फडणवीस से की बड़ी मांग
मुंबई के 12,000 सार्वजनिक गणेश मंडलों पर रीडिवेलपमेंट का संकट, महासंघ ने मुख्यमंत्री फडणवीस से स्थायी जमीन का मालिकाना हक मांगा।
मुंबई के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ताने-बाने में गणेशोत्सव का विशेष स्थान है। 133 वर्षों की समृद्ध परंपरा वाले इस उत्सव में अकेले मुंबई शहर में लगभग 12,000 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल हिस्सा लेते हैं। लेकिन मुंबई में पुरानी और म्हाडा इमारतों के बड़े पैमाने पर चल रहे रीडिवेलपमेंट के बीच इन मंडलों के अस्तित्व और उनकी सामाजिक सेवाओं पर संकट खड़ा हो गया है।
अखिल सार्वजनिक गणेशोत्सव महासंघ के अनुसार, रीडिवेलपमेंट की आड़ में कई बिल्डरों द्वारा गणेशोत्सव मंडपों के शेड और सभागारों को खाली कराने का दबाव बनाया जा रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए महासंघ ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर गणेशोत्सव मंडपों को स्थायी जगह का मालिकाना हक देने की पुरजोर मांग की है।
महासंघ के अध्यक्ष जयेंद्र सालगांवकर, कार्याध्यक्ष सुहास अडीवरेकर और प्रमुख कार्यवाह सुरेश सरनोबत ने सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि सार्वजनिक गणेश मंडल केवल 10 दिनों का त्योहार आयोजित नहीं करते, बल्कि पूरे वर्ष विभिन्न सामाजिक उपक्रम भी संचालित करते हैं।
महासंघ ने बताया कि नगरसेवक, विधायक और सांसद निधि से बनाए गए शेड और सभागारों में गणेश मंडलों द्वारा बालवाड़ी, लाइब्रेरी, फिजियोथेरेपी सेंटर, ब्लड बैंक, मेडिकल सेंटर और जिम जैसी जनसेवाएं संचालित की जाती हैं। इन सेवाओं का लाभ आम जनता को बहुत ही कम दरों पर मिलता है।
महासंघ का कहना है कि यदि बिल्डरों द्वारा इन जगहों को छीन लिया गया, तो केवल गणेशोत्सव के आयोजन पर ही संकट नहीं आएगा, बल्कि स्थानीय नागरिकों को मिलने वाली सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य तथा सामाजिक सेवाएं भी बंद हो जाएंगी। ऐसे में रीडिवेलपमेंट के कारण पैदा हुए संकट को देखते हुए सरकार का हस्तक्षेप जरूरी है।
अखिल सार्वजनिक गणेशोत्सव महासंघ ने मांग की है कि म्हाडा या संबंधित सरकारी संस्थाओं के माध्यम से इन जमीनों का मालिकाना हक वाजिब दामों पर सीधे गणेशोत्सव मंडलों के नाम किया जाए। महासंघ के अनुसार, इससे हिंदू संस्कृति का यह पवित्र और ऐतिहासिक त्योहार आने वाली पीढ़ियां भी बिना किसी रुकावट के मना सकेंगी।
महासंघ ने यह भी याद दिलाया कि सभी सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल मुंबई धर्मादाय आयुक्त के पास पंजीकृत हैं और नियमित रूप से अपना वार्षिक लेखा-जोखा जमा करते हैं। ऐसे में महासंघ ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर इन मंडलों के अधिकारों की रक्षा करने और रीडेवलपमेंट के कारण पैदा हो रहे संकट से मुंबई के पारंपरिक सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।